यमन के हूती विद्रोहियों ने सोमवार को बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के पास दो अमेरिकी युद्धपोतों पर ड्रोन और मिसाइलों से हमला किया, लेकिन अमेरिकी युद्धपोतों ने इन हमलों को नाकाम कर दिया। यह जानकारी अमेरिका के रक्षा विभाग ने मंगलवार को दी। रक्षा विभाग के प्रवक्ता मेजर जनरल पैट राइडर ने बताया कि हमलावरों ने कम से कम आठ ड्रोन, पांच एंटी-शिप बैलिस्टिक मिसाइल और तीन एंटी-शिप क्रूज मिसाइलों का उपयोग किया। हालांकि, इन हमलों में अमेरिकी जहाजों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा और न ही कोई सैनिक घायल हुआ।
राइडर ने यह भी स्पष्ट किया कि हूती विद्रोहियों ने जिस विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन पर हमला करने का दावा किया था, वह गलत है। यूएसएस अब्राहम लिंकन को निशाना नहीं बनाया गया था। उन्होंने कहा कि ऐसे हमले बहुत कम होते हैं, और इस बार भी अमेरिकी युद्धपोतों ने इन हमलों का सफलतापूर्वक सामना किया। हूती समूह ने बताया कि गाजा में इस्राइल के खिलाफ संघर्ष में फिलिस्तीनियों का समर्थन करने के लिए उन्होंने ये हमले किए हैं। पिछले साल अक्तूबर में इस्राइल और हमास के बीच युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान समर्थित समूहों ने लेबनान, इराक, सीरिया और यमन में हमले तेज कर दिए हैं, जिनमें अमेरिकी युद्धपोत भी निशाना बनाए गए हैं। हालांकि अमेरिका ने अब तक इन हमलों को सफलतापूर्वक विफल किया है।
हूती विद्रोहियों के हमलों के जवाब में अमेरिका ने उनके हथियारों के भंडारण स्थलों पर हमला किया। पेंटागन ने बताया कि इन स्थलों पर उन्नत हथियार रखे हुए थे, जिनका इस्तेमाल अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय सैन्य व नागरिक जहाजों पर हमले के लिए किया जा सकता था। ये हमले अमेरिकी वायु सेना और नौसेना के सहयोग से किए गए। अपनी सुरक्षा को मजबूत करने के लिए अमेरिका ने इस क्षेत्र में सैन्य उपस्थिति बढ़ाई है। इसके अलावा, हूती विद्रोहियों की गतिविधियों को सीमित करने के लिए अमेरिका ने कई बार उनके ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं। अमेरिका और अन्य देशों ने इस क्षेत्र में सैन्य जहाजों को तैनात किया है ताकि अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग और व्यापार मार्ग सुरक्षित रहें।
हूती विद्रोहियों ने अमेरिकी युद्धपोतों पर मिसाइलों और ड्रोन से हमला किया




