भारत में कैंसर तेजी से बढ़ रहा है। यह एक ऐसी बीमारी है जिसका सही समय पर पता न चले तो इलाज कठिन हो सकता है। 2023 में ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में बताया गया था कि भारत में ब्रेस्ट और प्रोस्टेट कैंसर जैसे मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है। हाल ही में भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर ) ने कहा कि भारत में 2022 से 2045 के बीच कैंसर के मामलों और मौतों में वृद्धि का अनुमान है।
ब्रिक्स देशों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) में कैंसर के मामलों, उससे होने वाली मौतों और उनके दैनिक जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर एक अध्ययन में खुलासा हुआ है कि भारत में मुंह और ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम बढ़ रहा है। आईसीएमआर -नेशनल सेंटर फॉर डिजीज इन्फॉर्मेटिक्स एंड रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार, पुरुषों में होंठ और मुंह के कैंसर सबसे अधिक पाए गए, जबकि महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के मामले सबसे अधिक रहे।
कैंसर एपिडेमियोलॉजी में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, दुनिया भर में कैंसर से होने वाली कुल मौतों का 20 प्रतिशत हिस्सा ब्रिक्स देशों में होता है। अध्ययन के लेखकों का कहना है कि 2022 से 2045 के बीच भारत और दक्षिण अफ्रीका में कैंसर के मामलों और मौतों में तेजी से वृद्धि होगी। अध्ययन के लेखक सतीशकुमार के अनुसार, 2020 की तुलना में 2025 में भारत में कैंसर के मामलों में 12.8 प्रतिशत वृद्धि होने का अनुमान है और यह वृद्धि लगातार जारी रहेगी।
रूस में पुरुषों और महिलाओं में नए प्रकार के कैंसर के मामले सबसे अधिक पाए गए, जहां पुरुषों में प्रोस्टेट, लंग्स और कोलोरेक्टल कैंसर सबसे आम थे। अधिकांश ब्रिक्स देशों में महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर प्रमुख था, जबकि भारत में पुरुषों में होंठ और मुंह के कैंसर का इलाज सबसे ज्यादा किया गया। दक्षिण अफ्रीका में पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए कैंसर से होने वाली मृत्यु दर सबसे अधिक थी। रूस में पुरुषों में और दक्षिण अफ्रीका में महिलाओं में कैंसर से सबसे अधिक मौतें हुईं। अध्ययन में यह भी बताया गया है कि भारत को छोड़कर सभी ब्रिक्स देशों में लंग्स कैंसर से सबसे अधिक मौतें होती हैं।
रिसर्च के अनुसार, आने वाले वर्षों में भारत और दक्षिण अफ्रीका में कैंसर के नए मामलों और कैंसर से संबंधित मौतों में सबसे अधिक वृद्धि की संभावना है। ब्रिक्स देशों के पास कैंसर को नियंत्रित करने के उपाय तो हैं, लेकिन स्वास्थ्य प्रणालियों में सुधार और कैंसर के बढ़ते जोखिमों का आकलन करना आवश्यक है।
आईसीएमआर ने कहा, भारत में तेजी से बढ़ रहे हैं मुंह और ब्रेस्ट कैंसर के मामले






