
713 की जगह अब सिर्फ एक छात्र को ही परीक्षा में बैठने की अनुमति दी
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान एसआई भर्ती परीक्षा से जुड़े अपने 2 अप्रैल के आदेश में अहम संशोधन करते हुए बड़ा फैसला लिया है। अब पहले दिए गए निर्देश के विपरीत 713 उम्मीदवारों के बजाय केवल एक अभ्यर्थी, सूरज मल मीणा, को ही 5 और 6 अप्रैल को होने वाली परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी गई है। आरपीएससी की अपील पर सुनवाई करते हुए अदालत ने माना कि पूर्व आदेश के दौरान कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों को पूरी तरह प्रस्तुत नहीं किया गया था। अन्य अभ्यर्थियों को अब हाईकोर्ट के अंतिम निर्णय का इंतजार करना होगा। राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) द्वारा आयोजित सब-इंस्पेक्टर (एसआई) और प्लाटून कमांडर भर्ती परीक्षा 2025 को लेकर यह घटनाक्रम काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शीर्ष अदालत ने अवकाश के दिन विशेष पीठ गठित कर अपने ही एक दिन पुराने आदेश में बदलाव किया, जिससे अब बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों की परीक्षा में शामिल होने की संभावना समाप्त हो गई है।
दरअसल, 5 और 6 अप्रैल को आयोजित होने वाली इस परीक्षा में लगभग 1,015 पदों के लिए 7.70 लाख से अधिक अभ्यर्थी शामिल होने वाले हैं। इससे पहले पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोपों के चलते परीक्षा रद्द कर दी गई थी। दोबारा परीक्षा कराने के निर्णय के दौरान उन अभ्यर्थियों को आयु में छूट नहीं दी गई, जो इस बीच अधिकतम आयु सीमा पार कर चुके थे। इसी मुद्दे को लेकर अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का रुख किया था। जहां एकल पीठ ने उन्हें परीक्षा में बैठने की अनुमति दी, वहीं द्वैध पीठ ने उस आदेश पर रोक लगा दी। इसके बाद सूरज मल मीणा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। 2 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता सहित 713 अभ्यर्थियों को अस्थायी राहत देते हुए परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी थी और आयोग को प्रोविजनल एडमिट कार्ड जारी करने के निर्देश दिए थे। हालांकि, अगले ही दिन आरपीएससी ने पुनः अदालत का दरवाजा खटखटाते हुए कहा कि पिछली सुनवाई में सभी तथ्य पूरी तरह सामने नहीं रखे गए थे। आयोग की दलीलों पर विचार करते हुए जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने अपने पूर्व आदेश में संशोधन किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि अब केवल याचिकाकर्ता सूरज मल मीणा को ही परीक्षा में शामिल होने की अनुमति होगी। साथ ही, अन्य अभ्यर्थियों को हाईकोर्ट में अपनी याचिका जारी रखने का विकल्प दिया गया है। अदालत ने यह भी कहा कि यदि हाईकोर्ट का अंतिम फैसला अभ्यर्थियों के पक्ष में आता है, तो आयोग को उनके लिए अलग से परीक्षा आयोजित करनी पड़ सकती है। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि न्यायालय के आदेश के तहत परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों का परिणाम हाईकोर्ट के अंतिम निर्णय तक घोषित नहीं किया जाएगा।






