
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय नौसेना को दो अत्याधुनिक युद्धपोत आईएनएस तारागिरी और आईएनएस अरिदमन सौंपे…
आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में आयोजित एक भव्य समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय नौसेना को दो अत्याधुनिक युद्धपोत आईएनएस तारागिरी और आईएनएस अरिदमन सौंपे। इस अवसर पर नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान सहित कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी मौजूद रहे। प्रोजेक्ट 17A के तहत निर्मित ये युद्धपोत नौसेना की ताकत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएंगे।
आईएनएस तारागिरी: स्वदेशी तकनीक का शानदार उदाहरण
आईएनएस तारागिरी प्रोजेक्ट 17A के तहत तैयार चौथा स्टेल्थ फ्रिगेट है, जो ‘मेक इन इंडिया’ पहल की बड़ी उपलब्धि है। करीब 6,670 टन वजनी यह युद्धपोत आधुनिक तकनीक और उन्नत हथियारों से लैस है।
मुख्य विशेषताएं:
- स्टेल्थ तकनीक से लैस, जिससे रडार की पकड़ से बचना संभव
- ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल से सटीक हमला क्षमता
- MF STAR रडार सिस्टम द्वारा उन्नत लक्ष्य पहचान
- MRSAM एयर डिफेंस सिस्टम से मजबूत वायु सुरक्षा
- 30mm और 12.7mm CIWS से करीबी मुकाबले में बढ़त
- पनडुब्बी रोधी हथियारों (ASW) से लैस
यह युद्धपोत सतह, वायु और पनडुब्बी रोधी अभियानों में भारतीय नौसेना को और सशक्त बनाएगा, खासतौर पर हिंद-प्रशांत क्षेत्र में।
आईएनएस अरिदमन: परमाणु शक्ति से लैस रणनीतिक पनडुब्बी
आईएनएस अरिदमन भारत की एडवांस्ड न्यूक्लियर पावर्ड बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (SSBN) है, जो देश की समुद्री परमाणु क्षमता का महत्वपूर्ण स्तंभ है। यह दुश्मन को दूर से जवाब देने की ताकत प्रदान करती है।
मुख्य विशेषताएं:
- 8 वर्टिकल लॉन्च ट्यूब, K-4 और K-15 मिसाइलों के लिए
- गहरे समुद्र में छिपकर ऑपरेशन करने की क्षमता
- लगभग 125 मीटर लंबाई और 7,000 टन वजन
- एडवांस्ड टेक्नोलॉजी वेसल (ATV) प्रोजेक्ट के तहत विकसित
आईएनएस अरिदमन भारत की त्रिस्तरीय परमाणु निरोधक क्षमता को और मजबूत बनाती है।
रणनीतिक महत्व
आईएनएस तारागिरी और आईएनएस अरिदमन का नौसेना में शामिल होना भारत की समुद्री सुरक्षा, क्षेत्रीय प्रभाव और सामरिक शक्ति को नई मजबूती देता है। बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में ये दोनों युद्धपोत भारत को रणनीतिक बढ़त दिलाने में महत्वपूर्ण साबित होंगे।
रक्षा मंत्री का बयान
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय नौसेना ने हमेशा संकट के समय अपनी तत्परता और क्षमता साबित की है, चाहे वह मानवीय सहायता हो या समुद्री सुरक्षा। उन्होंने कहा कि आईएनएस तारागिरी के शामिल होने से नौसेना की ताकत और बढ़ेगी और यह देश की सुरक्षा को और मजबूत करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि भारत का समुद्र से संबंध सदियों पुराना है और समय के साथ यह और मजबूत हुआ है। देश की 11,000 किलोमीटर लंबी तटरेखा, 95% समुद्री व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा को देखते हुए एक मजबूत नौसेना आज की जरूरत बन चुकी है। रक्षा मंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत को केवल अपनी सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि वैश्विक समुद्री मार्गों, चोक पॉइंट्स और महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा भी सुनिश्चित करनी होगी।






