
जम्मू-कश्मीर के डोडा क्षेत्र में रविवार तड़के भूकंप के झटके महसूस किए गए। सुबह 4 बजकर 32 मिनट पर आए इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.6 दर्ज की गई। राहत की बात यह है कि अब तक किसी तरह के बड़े नुकसान या जनहानि की खबर सामने नहीं आई है। इससे एक दिन पहले महाराष्ट्र और उत्तराखंड में भी भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए थे। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, भूकंप का केंद्र डोडा क्षेत्र के आसपास ही रहा, जहां हल्की कंपन दर्ज की गई। स्थानीय प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
भूकंप क्यों आता है?
पृथ्वी के भीतर सात प्रमुख टेक्टोनिक प्लेट्स होती हैं, जो लगातार गतिशील रहती हैं। जब ये प्लेट्स आपस में टकराती हैं, तो उस क्षेत्र को फॉल्ट लाइन कहा जाता है। बार-बार के टकराव से प्लेट्स में तनाव बढ़ता है और जब यह दबाव सीमा से अधिक हो जाता है, तो प्लेट्स टूटने लगती हैं। इसी प्रक्रिया के दौरान भूगर्भीय ऊर्जा बाहर निकलती है, जिससे भूकंप उत्पन्न होता है। भूकंप का केंद्र (एपिसेंटर) वह स्थान होता है, जिसके ठीक नीचे प्लेटों की हलचल से ऊर्जा निकलती है। इस स्थान पर झटके सबसे ज्यादा महसूस होते हैं, जबकि दूरी बढ़ने के साथ इनका असर कम होता जाता है।
भूकंप की तीव्रता कैसे मापी जाती है?
भूकंप की तीव्रता मापने के लिए रिक्टर स्केल का उपयोग किया जाता है, जिसे रिक्टर मैग्नीट्यूड स्केल भी कहा जाता है। इस पैमाने पर भूकंप की तीव्रता 1 से 9 या उससे अधिक तक दर्ज की जाती है। यह माप भूकंप के केंद्र से निकलने वाली ऊर्जा के आधार पर तय होता है, जिससे उसके प्रभाव और संभावित नुकसान का अनुमान लगाया जाता है।
रिक्टर स्केल और भूकंप का प्रभाव

फिलहाल डोडा में आए इस मध्यम तीव्रता के भूकंप से किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार सतर्कता और जागरूकता बेहद जरूरी है।






