
केंद्र सरकार ने देश की सैन्य व्यवस्था में व्यापक बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए शीर्ष स्तर पर दो अहम नियुक्तियों की घोषणा की है। सरकार ने लेफ्टिनेंट जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि (सेवानिवृत्त) को देश का अगला चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) नियुक्त किया है, जबकि वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन को भारतीय नौसेना का नया प्रमुख बनाया गया है। इन नियुक्तियों को सशस्त्र बलों में नेतृत्व परिवर्तन के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। लेफ्टिनेंट जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि 30 मई 2026 को वर्तमान सीडीएस जनरल अनिल चौहान का कार्यकाल समाप्त होने के बाद पदभार संभालेंगे। सीडीएस के रूप में वह न केवल तीनों सेनाओं थलसेना, नौसेना और वायुसेना के बीच समन्वय को मजबूत करेंगे, बल्कि सैन्य मामलों के विभाग (डिपार्टमेंट ऑफ मिलिट्री अफेयर्स) के सचिव की जिम्मेदारी भी निभाएंगे। यह पद देश की रक्षा नीति और रणनीतिक फैसलों में सरकार को सलाह देने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
नए सीडीएस के पास चार दशक लंबा सैन्य अनुभव
लगभग चार दशकों के समृद्ध सैन्य अनुभव के साथ लेफ्टिनेंट जनरल सुब्रमणि भारतीय सेना के अत्यंत सम्मानित अधिकारियों में शामिल रहे हैं। उन्हें पीवीएसएम, एवीएसएम, एसएम और वीएसएम जैसे कई प्रतिष्ठित सैन्य अलंकरणों से सम्मानित किया जा चुका है। वह सितंबर 2025 से राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय में सैन्य सलाहकार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इससे पहले वह सेना के उप प्रमुख (वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ) और सेंट्रल कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (GOC-in-C) जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं। पश्चिमी और उत्तरी सीमाओं पर उनकी सक्रिय भूमिका और रणनीतिक समझ को देखते हुए सरकार ने उन्हें इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के लिए चुना है।

वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन बनेंगे नौसेना प्रमुख
दूसरी ओर, वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन 31 मई 2026 को भारतीय नौसेना के नए चीफ ऑफ नेवल स्टाफ (सीएनएस) का पदभार ग्रहण करेंगे। वर्तमान में वह मुंबई स्थित वेस्टर्न नेवल कमांड के प्रमुख के रूप में कार्यरत हैं और उनका कार्यकाल 31 दिसंबर 2028 तक रहेगा। अपने लंबे नौसैनिक करियर के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं और समुद्री सुरक्षा से जुड़े अभियानों में उल्लेखनीय योगदान दिया है।
वाइस एडमिरल स्वामीनाथन को 1 जुलाई 1987 को भारतीय नौसेना में कमीशन मिला था। वह कम्युनिकेशन और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर के विशेषज्ञ माने जाते हैं। उन्होंने अपनी प्रारंभिक सैन्य शिक्षा राष्ट्रीय रक्षा अकादमी से प्राप्त की है। इसके अलावा उन्होंने ब्रिटेन के जॉइंट सर्विसेज कमांड एंड स्टाफ कॉलेज, करंजा स्थित कॉलेज ऑफ नेवल वॉरफेयर और अमेरिका के यूएस नेवल वॉर कॉलेज से भी उच्चस्तरीय प्रशिक्षण हासिल किया है। उनका अंतरराष्ट्रीय अनुभव भारतीय नौसेना की क्षमता और रणनीतिक दृष्टिकोण को और सशक्त बनाने में सहायक माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन नई नियुक्तियों के साथ भारत की रक्षा तैयारियों, संयुक्त सैन्य रणनीति और समुद्री सुरक्षा ढांचे को और मजबूती मिलेगी। नए नेतृत्व के तहत तीनों सेनाओं के बीच तालमेल को और बेहतर बनाने तथा बदलती वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने पर विशेष जोर दिया जाएगा।






