सरकार ने नहीं बढ़ाई ‘जीपीएफ’ पर मिलने वाली ब्याज दरें, पांच साल से ब्याज दरों में बदलाव नहीं

केंद्र सरकार ने 2024-25 के लिए ‘1 अक्टूबर से 31 दिसंबर’ की तिमाही के दौरान सामान्य भविष्य निधि (जीपीएफ) पर ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। पिछले पांच वर्षों से ब्याज दरें एक ही स्तर पर बनी हुई हैं, जिसे केंद्रीय कर्मचारियों के लिए एक झटका माना जा रहा है। वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग ने 3 अक्टूबर को जीपीएफ की ब्याज दरों की घोषणा की, जिसमें बताया गया कि इस तिमाही में भी ब्याज दर 7.1% ही रहेगी। इससे पहले जुलाई-सितंबर तिमाही में भी यही दर लागू थी। सरकार से ब्याज दरों में बदलाव की उम्मीद थी। वित्त मंत्रालय ने ‘1 अक्टूबर से 31 दिसंबर’ की तिमाही के दौरान जनरल प्रोविडेंट फंड और उससे जुड़े अन्य प्रोविडेंट फंडों की ब्याज दरों की घोषणा की है। सरकारी कर्मचारियों को इस बार एनडीए सरकार से ब्याज दरों में बदलाव की उम्मीद थी, लेकिन मंत्रालय ने कोई बदलाव नहीं किया। ब्याज दरों को लंबे समय से स्थिर रखा गया है।
कोरोना काल के दौरान भी दरें नहीं बढ़ीं। वर्ष 2021-22 के दौरान सामान्य भविष्य निधि और इसी तरह की अन्य निधियों पर 7.1% ब्याज दर 1 जुलाई 2021 से 30 सितंबर 2021 तक लागू रही। उस समय देश कोरोना की दूसरी लहर से प्रभावित था, और केंद्रीय कर्मचारियों का महंगाई भत्ता भी 18 महीने तक रुका हुआ था। कर्मचारियों को उम्मीद थी कि सरकार जीपीएफ की ब्याज दरों में बढ़ोतरी करेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। 1 जुलाई 2020 से 30 सितंबर 2020 तक भी जीपीएफ पर ब्याज दर 7.1% ही रही। ये दरें सामान्य भविष्य निधि (केंद्रीय सेवाएं), अंशदायी भविष्य निधि (भारत), अखिल भारतीय सेवा भविष्य निधि, राज्य रेलवे भविष्य निधि (रक्षा सेवाएं), भारतीय आयुद्ध विभाग भविष्य निधि, भारतीय आयुद्ध कारखाना कामगार भविष्य निधि, भारतीय नौसेना गोदी कामगार भविष्य निधि, रक्षा सेवा अधिकारी भविष्य निधि, और सशस्त्र सेना कार्मिक भविष्य निधि पर लागू होती हैं। जीपीएफ में जमा राशि पर बैंकों की तुलना में अधिक ब्याज मिलता है, इसलिए कई कर्मचारी इसमें अधिक योगदान करते हैं। यह कटौती बड़े खर्चों के समय उपयोगी होती है।
अब वार्षिक योगदान सीमा 5 लाख रुपये है। कर्मचारी जीपीएफ से 90% तक राशि निकाल सकते हैं, हालांकि नियम समय-समय पर बदलते रहते हैं। बच्चों की शिक्षा, शादी, मकान खरीदने या बनाने, मकान की मरम्मत, या लोन चुकाने जैसे कामों के लिए जीपीएफ की राशि का उपयोग किया जाता है। दो साल पहले केंद्र सरकार ने एक वित्तीय वर्ष में जीपीएफ में वार्षिक योगदान की सीमा 5 लाख रुपये तय की थी। नए नियम के अनुसार, एक वित्तीय वर्ष में जीपीएफ खाते में जमा की गई राशि 5 लाख रुपये से अधिक नहीं हो सकती।

विशिखा मीडिया

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