
सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा है कि भारतीय सेना महिलाओं को इन्फैंट्री (पैदल सेना) में शामिल करने के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन यह फैसला समाज की स्वीकार्यता और समान मानकों की पूर्ति पर निर्भर करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि महिलाओं को कमजोर वर्ग के रूप में नहीं देखा जाएगा और नई भूमिकाएं उनके प्रदर्शन के आधार पर चरणबद्ध तरीके से खोली जाएंगी। जनरल द्विवेदी ने कहा कि सेना की सोच पूरी तरह जेंडर न्यूट्रल है। यदि मानक समान हों, क्षमताएं बराबर हों और समाज इसे स्वीकार करे, तो महिलाओं को लड़ाकू भूमिकाओं में शामिल करना तुरंत संभव है। सेना प्रमुख ने बताया कि चिकित्सा और संचालन से जुड़ी व्यावहारिक चुनौतियों के कारण समान मानकों को लागू करना आसान नहीं है, लेकिन महिलाओं के प्रदर्शन के आंकड़ों के आधार पर नए सैन्य रोल खोले जाएंगे। शुरुआत सहायक बलों से होगी, इसके बाद लड़ाकू इकाइयों और आगे चलकर स्पेशल फोर्सेज तक रास्ता खुलेगा।
सेना में महिलाओं की वर्तमान स्थिति
- भारतीय सेना में करीब 8,000 महिला अधिकारी कार्यरत हैं।
- एनडीए में 60 महिला कैडेट मौजूद हैं, हर साल 20 और जोड़ने की योजना है।
- ओटीए से हर साल 120 महिला अधिकारियों की भर्ती हो रही है।
- प्रादेशिक सेना में महिलाओं के लिए 110 पद उपलब्ध कराए जाएंगे।
- सेना का लक्ष्य 2032 तक ओआरएल श्रेणी में महिलाओं की भर्ती को 12 गुना तक बढ़ाने का है।
आधुनिकीकरण पर फोकस
भविष्य की जंग को ध्यान में रखते हुए सेना का आधुनिकीकरण सर्वोच्च प्राथमिकता है। ड्रोन रेजीमेंट्स, रॉकेट-सह-मिसाइल बल, लोइटरिंग म्यूनिशन और स्वदेशी गोला-बारूद पर तेजी से काम हो रहा है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद ड्रोन क्षमताओं में बड़ा विस्तार हुआ है और प्रत्येक कमांड में हजारों ड्रोन तैनात करने की क्षमता विकसित की गई है।







