दिल्ली हाईकोर्ट ने पीएम केयर्स फंड से जुड़े आरटीआई मामले में अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि केवल यह तथ्य कि कोई फंड सार्वजनिक कार्य करता है या सार्वजनिक प्राधिकरण माना जाता है, उसके निजता के अधिकार को समाप्त नहीं करता। मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि सार्वजनिक कार्य करने वाली संस्थाओं को भी निजता का अधिकार प्राप्त है। पीएम केयर्स फंड को केवल इस आधार पर आरटीआई के दायरे में नहीं लाया जा सकता।
जानिए क्या है मामला
मुंबई के सामाजिक कार्यकर्ता गिरीश मित्तल ने आरटीआई के तहत पीएम केयर्स फंड को मिलने वाली टैक्स छूट से संबंधित जानकारी मांगी थी। केंद्रीय सूचना आयोग ने आयकर विभाग को जानकारी देने का आदेश दिया था, लेकिन हाईकोर्ट के एकल न्यायाधीश ने उस आदेश को रद्द कर दिया। इसी फैसले को अब चुनौती दी गई है।
याचिकाकर्ता की दलील
याचिकाकर्ता का तर्क है कि आरटीआई अधिनियम की धारा 8(1)(जे) के तहत निजता की छूट केवल व्यक्तियों के लिए है, न कि पीएम केयर्स जैसे पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट के लिए। हालांकि, एकल न्यायाधीश ने कहा था कि केंद्रीय सूचना आयोग को आयकर अधिनियम की धारा 138 के तहत आने वाली जानकारी सार्वजनिक कराने का अधिकार नहीं है। इस मामले की अगली सुनवाई 10 फरवरी को होगी।






