सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह अब खुद करेंगी कोर्ट में पैरवी

भोपाल के बहुचर्चित त्विषा शर्मा संदिग्ध मौत मामले में अब एक अहम और नया मोड़ सामने आया है, जिसने इस केस को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह ने बड़ा फैसला लेते हुए अब स्वयं अदालत में अपना पक्ष रखने का निर्णय लिया है। इससे पहले तक उनकी ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता इनोश जॉर्ज कार्लो ने हालिया मीडिया विवाद के बाद इस केस से खुद को अलग कर लिया है। शनिवार को सामने आए इस घटनाक्रम के बाद यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। जानकारी के अनुसार, गिरिबाला सिंह अब अपनी बहू त्विषा शर्मा की संदिग्ध मौत से जुड़े मामले में सीधे न्यायालय में पेश होकर अपनी दलीलें रखेंगी। वकील के केस छोड़ने के बाद उन्होंने यह रणनीतिक निर्णय लिया है, जिसे कानूनी दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

गौरतलब है कि कटारा हिल्स स्थित निवास में हुई त्विषा शर्मा की संदिग्ध मौत के बाद दर्ज मामले में गिरिबाला सिंह को दहेज हत्या का आरोपी बनाया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने उसी दिन भोपाल की अदालत से अग्रिम जमानत प्राप्त कर ली थी, जिससे उन्हें अस्थायी राहत मिली थी। हालांकि, अब यह राहत बरकरार रह पाएगी या नहीं, इस पर संशय बना हुआ है। दरअसल, मृतका त्विषा शर्मा के पिता नवनिधि शर्मा ने भोपाल अदालत द्वारा दी गई अग्रिम जमानत को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में गंभीर आरोप लगाए गए हैं कि गिरिबाला सिंह ने मामले से जुड़े साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की है। हाई कोर्ट ने इस याचिका पर संज्ञान लेते हुए नोटिस जारी किया है और पूछा है कि गंभीर आरोपों के बावजूद दी गई अग्रिम जमानत को निरस्त क्यों न किया जाए। इस महत्वपूर्ण याचिका पर अगली सुनवाई 25 मई को निर्धारित की गई है।
इसी बीच, शनिवार सुबह अधिवक्ताओं की एक टीम गिरिबाला सिंह के निवास पर पहुंची, जहां मामले की आगामी रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई। सूत्रों के अनुसार, 25 मई को होने वाली सुनवाई के दौरान गिरिबाला सिंह स्वयं जबलपुर हाई कोर्ट में उपस्थित होकर अपना पक्ष रख सकती हैं। उल्लेखनीय है कि गिरिबाला सिंह न्यायिक सेवा के दौरान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, रजिस्ट्रार सहित मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की सदस्य सचिव जैसे महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दे चुकी हैं। ऐसे में उनका स्वयं अदालत में उतरना इस मामले को और भी अधिक चर्चित और संवेदनशील बना रहा है।
फिलहाल, पूरे मामले पर सबकी निगाहें 25 मई को होने वाली हाई कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां अग्रिम जमानत को लेकर कोई बड़ा फैसला सामने आ सकता है।





