‘370 रुपये की बिरयानी’ की अब तक की कहानी

एक टिप्पणी, लाखों व्यूज और फिर विवादों का लंबा सिलसिला—‘370 रुपये की बिरयानी’ मामला अब महज एक वायरल वीडियो तक सीमित नहीं रहा। यह विवाद नौकरी जाने, पुलिस जांच, महिला आयोग की दखल, इन्फ्लुएंसर्स की प्रतिक्रियाओं और राजनीतिक बयानों तक फैल चुका है।

दरअसल, एक स्टैंड-अप कॉमेडी शो में कही गई ‘370 रुपये की बिरयानी’ से जुड़ी टिप्पणी ने देखते ही देखते देशभर में बहस छेड़ दी। शुरुआत एक वायरल क्लिप से हुई, लेकिन मामला जल्द ही महिलाओं के प्रति नजरिये, सहमति (कंसेंट), कॉमेडी की सीमाओं, कंटेंट क्रिएटर्स की जिम्मेदारी और सोशल मीडिया की जवाबदेही जैसे गंभीर मुद्दों तक पहुंच गया। अब इस विवाद में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की भी एंट्री हो चुकी है।

पूरा मामला स्टैंड-अप कॉमेडियन प्रणीत मोरे के एक क्राउडवर्क वीडियो से शुरू हुआ, जिसमें वह दर्शकों से बातचीत कर रहे थे। इसी दौरान गुरुग्राम निवासी 22 वर्षीय हिमांशु जांगड़ा ने अपने एक डेटिंग अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि उसने एक लड़की के साथ डेट पर करीब 370 रुपये की चिकन बिरयानी खाई थी। बातचीत के दौरान उसने टिप्पणी की, “370 रुपये लगे हैं, उसे तो वसूल करूंगा ही।” आगे उसने यह भी संकेत दिया कि वह इस खर्च के बदले महिला के साथ शारीरिक संबंध चाहता था।
यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और इसे महिलाओं के प्रति अपमानजनक तथा सहमति की अवधारणा के खिलाफ माना गया। यहीं से विवाद ने तूल पकड़ लिया। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। बड़ी संख्या में लोगों ने इस टिप्पणी को महिलाओं के प्रति असम्मानजनक और पिछड़ी सोच का परिचायक बताया। आलोचकों ने कहा कि डेट पर खर्च किया गया पैसा किसी महिला पर अधिकार नहीं देता और इस तरह की सोच को मजाक के रूप में पेश करना भी गलत है।

प्रणीत मोरे भी क्यों आए सवालों में?
विवाद के बीच कॉमेडियन प्रणीत मोरे भी आलोचनाओं के घेरे में आ गए। आरोप लगे कि उन्होंने मंच पर ऐसी टिप्पणी का विरोध करने के बजाय हंसते हुए बातचीत जारी रखी। इसके अलावा यह भी सवाल उठा कि उन्होंने इस क्लिप को एडिट कर सोशल मीडिया पर पोस्ट क्यों किया। कई लोगों का मानना था कि इस वीडियो को साझा करना एक सोच-समझकर लिया गया निर्णय था, इसलिए इसकी जिम्मेदारी सिर्फ दर्शक की नहीं, बल्कि कॉमेडियन की भी है। लगातार आलोचनाओं के बीच प्रणीत मोरे ने भी माफी मांगी। उन्होंने कहा कि वीडियो में कही गई बातें उनके निजी विचारों का प्रतिनिधित्व नहीं करतीं और उन्हें उस समय अधिक संवेदनशील प्रतिक्रिया देनी चाहिए थी। विवादित वीडियो को हटा दिया गया और उनका सोशल मीडिया अकाउंट भी बाद में निष्क्रिय नजर आया। विवाद बढ़ने पर हिमांशु जांगड़ा की पहचान सार्वजनिक हुई और उन्हें सोशल मीडिया पर भारी आलोचना का सामना करना पड़ा। दबाव बढ़ने पर उन्होंने माफी मांगी और अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स डीएक्टिवेट कर दिए। हालांकि तब तक मामला राष्ट्रीय बहस बन चुका था। इस विवाद का सबसे बड़ा असर हिमांशु के पेशेवर जीवन पर पड़ा। उनकी कंपनी ने बयान जारी कर कहा कि वीडियो में दिए गए विचार कंपनी के मूल्यों के खिलाफ हैं। आंतरिक समीक्षा के बाद उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया। हालांकि कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि कार्यस्थल पर उनके खिलाफ किसी तरह की शिकायत नहीं थी और वे एक पेशेवर कर्मचारी थे। कंपनी ने साथ ही सोशल मीडिया ट्रायल को लेकर भी चिंता जताई और सुधार की संभावना बनाए रखने की बात कही।

विवाद के दौरान शो का एक और वीडियो भी चर्चा में
विवाद के दौरान शो का एक और वीडियो सामने आया, जिसमें डॉ. सेजल पवार नाम की महिला मेडिकल शिक्षा से जुड़े शवों और अंगों को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी करती दिखाई दीं। इस पर भी आलोचना हुई और उन्होंने बाद में माफी मांगी। मामला बढ़ने पर महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने अश्लील और आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित करने के आरोप में एफआईआर दर्ज की। इसमें प्रणीत मोरे, हिमांशु जांगड़ा, डॉ. सेजल पवार समेत अन्य लोगों को नामजद किया गया। भारतीय न्याय संहिता 2023 और आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई है। राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी इस मामले का संज्ञान लिया और संबंधित लोगों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। आयोग ने महिलाओं के खिलाफ इस तरह की टिप्पणियों को गंभीर मुद्दा बताया।

जोमैटो भी आया विवाद में
इस मामले के बीच फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म जोमैटो से जुड़ा एक कथित स्क्रीनशॉट भी वायरल हुआ, जिसमें ‘370 रुपये की बिरयानी’ का जिक्र था। हालांकि कंपनी ने इसे फर्जी बताते हुए साफ किया कि यह संदेश उनके प्लेटफॉर्म से जारी नहीं किया गया। साथ ही कंपनी ने संदेश दिया—“Biryani is dinner, not consent”, यानी खाने का खर्च किसी भी प्रकार की सहमति का आधार नहीं हो सकता।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की प्रतिक्रिया
विवाद के बीच मुंबई की मेयर द्वारा स्टैंड-अप कॉमेडी पर प्रतिबंध की मांग उठाए जाने पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि वे स्वयं भी स्टैंड-अप कॉमेडी का आनंद लेते हैं, लेकिन मनोरंजन के नाम पर सामाजिक मर्यादा और गरिमा का उल्लंघन नहीं होना चाहिए। उन्होंने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी और संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया। कई इन्फ्लुएंसर्स और कंटेंट क्रिएटर्स ने भी इस विवाद पर प्रतिक्रिया दी। कुछ ने कॉमेडियन्स से अपने कंटेंट में जिम्मेदारी दिखाने की अपील की, तो कुछ ने दोहरे मानदंडों पर सवाल उठाए। कई लोगों ने इस तरह के कंटेंट का विरोध करने की बात कही।

‘370 रुपये की बिरयानी’ विवाद अब एक साधारण टिप्पणी से कहीं आगे बढ़कर सामाजिक सोच, सहमति, अभिव्यक्ति की सीमाओं और डिजिटल जिम्मेदारी पर बड़ी बहस का विषय बन चुका है। यह मामला इस बात की भी याद दिलाता है कि सोशल मीडिया के दौर में एक बयान किस तरह व्यापक असर डाल सकता है।

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