आपको मानवता में विश्वास नहीं खोना चाहिए, मानवता एक सागर की तरह है…
यदि सागर की कुछ बूंदे खराब हों, तो पूरा सागर गंदा नहीं हो जाता है – महात्मा गांधी
सिद्धांत उस पटरी के समान हैं, जिस पर इंसान रुपी रेल चलती है। यदि रेल पटरी से उतरती है, तो हादसा होना निश्चित है। समाज के हर व्यक्ति को एक सिद्धांत के साथ अपना जीवन जीना चाहिए। सिद्धांत ही आपको समाज में प्रतिष्ठा दिलाते हैं, और गलत रास्ते पर चलने से रोकते हैं। बिना सिद्धांत इंसान उस दिये के समान हैं जो बिन बाती कभी प्रकाश नहीं फैला सकता। हमारे देश में कितने महापुरुष हुए जिन्होंने अपना पूरा जीवन सिद्धांतों के साथ जिया और समाज के समक्ष एक उदाहरण पेश किया, कि जीवन के लिए सिद्धांत कितने जरुरी हैं। महात्मा गांधी भी एक ऐसे ही महापुरुष थे, जिन्होंने बेहद सरल ढ़ंग से अपना पूरा जीवन व्यतीत किया और पूरे विश्व को यह दिखाया, कि कैसे एक व्यक्ति सिद्धांतों के साथ अपना जीवन खुशी के साथ बिता सकता है। महात्मा गांधी ने सत्य, अहिंसा, शाकाहारी, विश्वास, और अत्यावश्यक चीज़ों की इच्छा रखना, इनके जरिए यह समझाने की कोशिश की, कि किस प्रकार इनके साथ एक व्यक्ति अपना जीवन जी सकता है। आज हमारा समाज जिस दिशा में आगे बढ़ रहा है, वहाँ इन्ही सिद्धांतों की जरुरत महसूस होती है, क्योंकि गांधी जी के ये सिद्धांत ही समाज को पटरी पर लाकर एक नई दिशा दे सकते हैं।
गांधी जी का पहला सिद्धांत था “सत्य”… यानि वह ताकत जिससे आप किसी से भी नज़र मिला सकते हैं। जहाँ ये समाज झूठ बोलने में ज़रा भी नहीं हिचकिचाता, वहीं गांधी जी का सिद्धांत “सत्य” बेहद कारगर साबित होता हैं क्योंकि जहाँ पर सत्य का बोलबाला होता है, वहाँ बड़े से बड़ा झूठ भी ज्यादा देर तक नहीं टिकता। “सत्य” ही एक नए सिद्धांत यानी “विश्वास” को जन्म देता हैं। “विश्वास” गांधी जी का वह सिद्धांत, जो सत्य से ही जुड़ा है। जहाँ सत्य है, वहाँ विश्वास आ ही जाता हैं। गांधी जी के इस सिद्धांत का तात्पर्य है, कि हर धर्म सही है और अपने आप में बड़ा है। विश्वास का अर्थ है, कि अपने आपको या किसी और को कभी हीन न समझो। हर व्यक्ति और हर धर्म पर विश्वास रखो। आज के समाज में जहाँ जाति और धर्म के नाम पर खून खराबे होते हैं, वहाँ गांधी जी का ये सिद्धांत एक अहम भूमिका निभा सकता है। यदि हर जाति और धर्म के लोग एक दूसरे पर विश्वास रखेंगे, तो विश्व में शाँति बनी रहेगी।
गांधी जी का एक बेहद अहम् सिद्धांत और है “अहिंसा”। यह सिद्धांत हिंसा को रोकने के काम में आता है। ऐसा कोई दिन नहीं, जिसदिन हिंसा की खबरें सुनने को न मिलें। गांधी जी का “अहिंसा” का सिद्धांत पहले भी बहुत कारगर था, और आज के समय में भी इसकी बहुत जरुरत है। गांधी जी का एक और सिद्धांत है “शाकाहार”। यह सच है कि हम में से सभी शाकाहारी नहीं बन सकते, लेकिन मांसाहारी भोजन को कम जरुर कर सकते हैं। शाकाहार न केवल स्वास्थ के लिए लाभदायक है, बल्कि यह एक सादे जीवन का मूल मंत्र भी बन सकता है। गांधी जी का एक और सिद्धांत था, कि हम सबको अपने जरुरत भर की चीजें ही रखनी चाहिए, यह आज के युग में भी सही है। सच कहें तो इस समय गांधी जी के सिद्धांतों की हमें बहुत जरुरत है। दिन पर दिन बढ़ रही हिंसा, चाहे वह घरेलू हो या बॉर्डर पर, हम सब अहिंसा के सिद्धांत को अपनाकर समाज, देश, और विश्व में बढ रही हिंसा को खत्म कर सकते हैं। गांधी जी के अनेक सिद्धांत हैं, लेकिन हमे अपने भीतर इन्हें अपनाने की इच्छाशक्ति का होना जरुरी है। गांधी जी ने अपने सिद्धांतों की ताकत बहुत पहले ही पूरे विश्व को दिखा दी थी। अब यह हमारी ज़िम्मेदारी है, कि हम अपने भीतर इन सिद्धांतों के बीज बोकर एक बेहतर समाज की रचना करें। हमारी ज़िम्मेदारी यह भी है कि हम गांधी जी के इन्हीं सिद्धांतों के जरिए एक बार पुन: उनके द्वारा कल्पना किये गये समाज को दुनिया के समक्ष पेश कर, शाँति कायम करें।
” यदि आप समाज में बदलाव लाना चाहते हैं, तो पहले खुद को बदलिये” – महात्मा गांधी




