बढ़ रही है गैस और इलेक्ट्रिक चलित वाहनों की मांग

कारण पेट्रोल डीज़ल की बढ़ती कीमतें

देश में पेट्रोल तथा डीजल की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि ने लोगों को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। पेट्रोल तथा डीजल का दाम बढ़ने से अब लोगों का रुझान एलपीजी, सीएनजी तथा इलेक्ट्रिकल वाहनों की ओर बढने लगा है। विभिन्न राज्यों के आंकड़ों के अनुसार पिछले साल की अपेक्षा इस साल गैस तथा इलेक्ट्रिक चलित वाहनों का पंजीकरण बढ़ा है। कई राज्य भी अब सीएनजी तथा इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद को प्रोत्साहन देने लगे हैं। हालांकि पेट्रोल तथा डीजल चलित वाहनों के उपयोग का आंकड़ा अधिक है। लेकिन धीरे- धीरे जनता अब सीएनजी तथा इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बढ़ने लगी है। आइए जानते हैं कि आखिर लोगों का सीएनजी तथा इलेक्ट्रिकल वाहनों के प्रति बढ़ता रुख कितना फायदेमंद हैं तथा सरकार को इससे क्या प्रभाव पड़ेगा?

ईंधन के बढ़ते दामों से परेशान है जनता 

अधिकांश शहरों में पेट्रोल का दाम 100 से 110 रुपए तथा डीजल का दाम 95 से 100 रुपए प्रति लीटर पहुंच चुका है। यहीं नहीं हर दिन यह दाम 20 से 35 पैसे बढ जाता रहा है। पेट्रोल तथा डीजल के दामों में की जा रही बढ़ोत्तरी आम जनता की जेब पर भारी पड़ती जा रही है। पिछले 15 महीनों में ईंधन के दामों में करीबन 35 फीसदी बढ़े हैं, उसका नतीजा है कि अब आम जनता परेशान हो चुकी है। उनके अनुसार वाहन का खर्च दैनिक जीवन के अन्य खर्चों में सबसे ज्यादा है जो मुख्य चिंता का विषय बन गया है।

सीएनजी तथा इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बढ़ रहा है रुझान

पेट्रोल तथा डीजल के बढ़ते दामों को देखते हुए लोग सीएनजी तथा इलेक्ट्रिक वाहनों को खरीदना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। कई लोग अपनी पुरानी कार में ही सीएनजी/एलपीजी फिट कराने लगे हैं। पेट्रोल वाहनों में सीएनजी किट लगाने वाले एक कंपनी के प्रतिनिधि का कहना है कि सीएनजी करीबन 60 रुपये किलो है। 1500 सीसी इंजन की कार एक किलो गैस में 28 से 30 किमी तक का एवरेज देती है। इसके साथ ही 800 से 1300 सीसी इंजन की कार 30 किलोमीटर से अधिक का एवरेज देती है। सीएनजी कार प्रति किलोमीटर करीब दो रुपये की गैस खर्च करती है। जबकि पेट्रोल प्रति किलोमीटर 7 रुपये का खर्च होता है। इस हिसाब से प्रति किलोमीटर सीएनजी कार से पाँच रुपये की बचत होती है। इस हिसाब से पेट्रोल तथा डीजल वाले वाहनों की अपेक्षा लोगों को सीएनजी तथा इलेक्ट्रिक वाहनों का प्रयोग अधिक सुविधाजनक महसूस होने लगा है। 

इसके अतिरिक्त कई राज्यों ने भी अब सीएनजी तथा इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने का प्रयास शुरू कर दिया है। सीएनजी तथा इलेक्ट्रिक वाहन पर्यावरण के लिए भी फायेदमंद है। पर्यावरण के उद्देश्य से रोडवेज की बसों में भी सीएनजी किट लगाई जा रही है। स्मार्ट इंडिया की योजना के तहत स्मार्ट बसों का संचालन शुरू करने का निर्णय लिया गया है। भविष्य में सीएनजी तथा इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग का स्तर बढ़ते हुए देखकर अब कई राज्यों ने सीएनजी वाहनों से संबंधित योजनाओं को लागू करने का प्रयास शुरू कर दिया है।

ईंधन के दामों में परिवर्तन से बदल रहा है जनता का रुख

पहले जब डीजल के दाम कम थे तब भारत में लोगों का झुकाव डीजल वाली गाड़ियों के प्रति अधिक था। 2012-13 के समय यात्री वाहनों में 47%  डीजल चालित गाड़ियां थी। 2014 में डीजल के दामों को नियंत्रण मुक्त करते हुए बाजार के हवाले कर दिया गया था। जिसके पश्चात् लोगों का रुख डीजल वाले वाहनों से हटकर पेट्रोल चालित वाहनों की ओर होने लगा। इन दिनों पेट्रोल तथा डीजल के आसमान छूते दामों की वजह से लोग पेट्रोल तथा डीजल चालित वाहनों का उपयोग करने में संकोच कर रहे हैं, तथा उन्हें सीएनजी तथा इलेक्ट्रिक वाहनों का महत्व समझ में आने लगा है।

सीएनजी तथा इलेक्ट्रिक वाहनों के फायदे

प्रदूषण में कमी 

विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के मुताबिक विश्व के 20 सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में से भारत के 14 शहर शामिल हैं। प्रदूषण की रोकथाम के लिए जितना हो सके उतना प्रयास किया जाना चाहिए। पेट्रोल तथा डीजल वाले वाहनों का उपयोग करने से ऊर्जा पर अनियंत्रित प्रभाव तो पड़ता ही है साथ ही प्रदूषण का स्तर भी बढ़ता है। ऐसे में यदि सीएनजी तथा इलेक्ट्रिक वाहनों का प्रयोग होगा तो प्रदूषण पर रोक लगेगी।

तकनीक में प्रगति

बैटरी प्रौद्योगिकी में होने वाली प्रगति से ऊर्जा का घनत्व बढ़ सकता है। वाहनों के चार्जिंग के लिए प्रयुक्त होने वाली बैटरी की क्षमता में वृद्धि हो सकती है। आधुनिक मोटरों के साथ इन बैटरी को मिलाने से इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग तथा क्षमता का विकास होगा। जिससे लोग इस प्रकार के वाहनों का प्रयोग लंबे समय तक कर पाएंगे।

हालांकि पेट्रोल तथा डीजल के बढ़ते दामों ने आम जनता को अधिक प्रभावित किया है, इस कारण उनका रुख सीएनजी तथा इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बढ़ने लगा है। सरकार के कई कदम यह दर्शाते हैं कि आने वाले समय में इलेक्ट्रिक वाहनों की लहर आएगी। इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए ई-व्हीकल पॉलिसी की योजना शुरू की जा चुकी है। बैटरी संचालित वाहनों को बढ़ावा देने के लिए दुपहिया तथा तिपहिया वाहन खरीदने पर प्रोत्साहन राशि देने का भी प्रावधान किया गया है। जिससे चलते एलपीजी वाहनों की संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है।

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