अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद कई अफगानी नागरिक भारत की ओर पलायन कर रहे हैं। कब्जे के बाद वहां के धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर भी कई सवाल उठने लगे हैं। ऐसे में भारतीय वायुसेना और एयर इंडिया के विमान अफगान से हिंदुओं और सिखों को लगातार भारत ला रहे हैं। इसी बीच सिखों के पवित्र ग्रंथ गुरु ग्रंथ साहिब की 3 प्रतियों को भी काबुल से ताजिकिस्तान के दुशांबे होते हुए एयर इंडिया की एक विशेष विमान से दिल्ली लाया गया है। तालिबान के कब्जे के बाद आशंका व्यक्त की जा रही थी कि कहीं तालिबान गुरुद्वारों तथा गुरु ग्रंथ साहिब की प्रतियों को किसी तरह का नुकसान पहुंचाए। इसी आशंका के मद्देनजर इन प्रतियों को भारत लाया गया है।

प्रतियों को लेने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह खुद पहुंचे एयरपोर्ट
इन प्रतियों को लेने के लिए केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, विदेश राज्यमंत्री वी मुरलीधरन, बीजेपी के प्रवक्ता आर.पी सिंह, बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव दुष्यंत गौतम, बीजेपी के राष्ट्रीय युवा मोर्चा के सचिव तेजिंदर पाल सिंह बग्गा, प्रदेश प्रवक्ता आदित्य झा और ब्रजेश रायंद खुद एयरपोर्ट पहुंचे।
पालकी में सजाकर रखी प्रतियां
ग्रंथ साहिब की एक प्रति को केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने एयरपोर्ट पर उतारे जाने के बाद सिर पर रखा और नंगे पैर चलकर उसे वाहन तक लाए। एयरपोर्ट पर उतारने के बाद गुरु ग्रंथ साहिब की तीनों प्रतियों को एयरपोर्ट परिसर में पालकी के तौर पर सजाई गई एक बस में रखा गया। इस दौरान पंच प्यारे भी वहां पर मौजूद थे और पूरे रीति रिवाज और मान्यता से गुरु ग्रंथ साहिब की तीनों प्रतियों को उस पालकी में सुशोभित किया गया। अकाली दल नेता और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी दिल्ली के अध्यक्ष मनजिंदर सिंह सिरसा ने एयरपोर्ट पर खासतौर से लाई गई पालकी में गुरु ग्रंथ साहिब की प्रतियों को रखकर पश्चिमी दिल्ली के महावीर नगर गुरुद्वारे तक पहुंचाया, जहां उनको स्थापित करने के बाद शब्द कीर्तन और अरदास किया गया। सिख समुदाय और पवित्र धर्म ग्रंथ की प्रतियों को भारत लाने वाले लोग अफगानिस्तान में सिख परंपरा को पूरी तरह से खत्म होना बता रहे हैं।
‘हिंदुओं और सिखों को मिला सुरक्षित ठिकाना‘
केंद्रीय मंत्री पुरी ने कहा कि जो लोग सीएए कानून का विरोध कर रहे थे, आज वही इसकी कटआफ डेट को समायोजित करने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान से लोगों को सुरक्षित लाने के अभियान का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए। भारत हमेशा सताए हुए अल्पसंख्यकों की मदद करता रहेगा। बता दें, अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद अब तक 626 लोगों को भारत लाया गया है, जिसमें 228 भारतीय नागरिक और 77 अफगान सिख शामिल हैं। सिख समुदाय के लोगों ने इस मुश्किल समय में उन्हें आसरा देने के लिए प्रधानमंत्री मोदी का आभार व्यक्त किया है। अफगान से आए सेवादारों ने आभार जताते हुए कहा है कि उन्हीं की बदौलत हमें सुरक्षित ठिकाना मिला।
पुरी ने किया ट्वीट
केंद्रीय मंत्री पुरी ने ट्वीट कर कहा कि मुझे काबुल से दिल्ली पहुंचे गुरु ग्रंथ साहिब जी के तीन ‘स्वरूप’ की सेवा करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। पार्टी द्वारा जारी एक बयान के अनुसार पुरी ने कहा कि मानवता की सेवा करने के गुरु नानक देव जी के उपदेश का पूरे सिख समुदाय द्वारा पालन किया जा रहा है।
करोल बाग में अफगानी सिख
न्यूयॉर्क के समाजसेवी मनदीप सिंह सोबती की ओर से पुनर्वास प्रयासों में समन्वय कर रहे उद्यमी के. भल्ला ने कहा कि अफगानी सिख इंतजाम होने तक करोल बाग में एक होटल में ठहरेंगे। उन्होंने बताया कि सोबती और परमजीत सिंह आनंद ने अपने सोबती फाउंडेशन के जरिए सरकार के मार्गदर्शन में अफगानिस्तान के इन नागरिकों के पुनर्वास का जिम्मा उठाया है।
पहले भी भारत आ चुकी हैं प्रतियां
पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर एक तस्वीर वायरल हो रही है, जिसमें 3 सिख युवक सिर पर गुरु ग्रंथ साहिब की प्रतियों को लेकर नंगे पैर चल रहे है। जानकारी के लिए बता दें, कि गुरु ग्रंथ साहिब की प्रतियां भारत लाए जाने का ये पहला मौका नहीं है। इससे पहले 25 मार्च 2020 को एक गुरुद्वारे में इस्लामिक स्टेट ने हमला कर दिया था। गुरुद्वारे में हुए इस हमले में 25 लोगों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद भी पवित्र ग्रंथ की 7 प्रतियों को भारत लाया गया था। गुरु ग्रंथ साहिब की कुल 13 प्रतियां अफगानिस्तान में थीं, जिनमें से 7 को पहले ही भारत लाया जा चुका है।
‘अफगान में सिखों के एक युग की समाप्ति‘
काबुल के कारते परवान गुरुद्वारा समिति के सदस्य छबोल सिंह ने कहा कि 3 गुरु ग्रंथ साहिब भारत लाए गए हैं। इसके बाद अब 3 प्रतियां ही अफगानिस्तान में रह गई हैं। शिरोमणि अकाली दल के दिल्ली यूनिट के अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना ने कहा कि ये अफगानिस्तान में सिखों के एक युग की समाप्ति है। उन्होंने आगे कहा कि तालिबान द्वारा अफगानिस्तान पर कब्जा किए जाने से सिखों को अपने घर को छोड़कर निकलना पड़ा है। गुरुग्रंथ साहिब की 3 प्रतियां काबुल, गजनी और जलालाबाद के गुरुद्वारों से बेहद भारी मन से भारत लाई गई हैं।
अफगान में 16वीं शताब्दी में पड़ी थी सिख समुदाय की नींव
अफगानिस्तान का सिख पंथ से पुराना नाता रहा है। सिख पंथ के संस्थापक गुरु नानक देव ने भी अफगानिस्तान की यात्रा की थी और शांति, भाईचारे और सहिष्णुता का संदेश दिया था। 16वीं शताब्दी में अफगानिस्तान में उनके दौरे के साथ ही वहां सिख धर्म की नींव पड़ी थी।
15 अगस्त को तालिबान ने किया अफगान पर कब्जा
15 अगस्त 2021 को तालिबान का अफगानिस्तान पर कब्जा होने के बाद वहां के राष्ट्रपति अशरफ गनी देश छोड़कर भाग गए, और इसके बाद से ही लगातार काबुल एयरपोर्ट से लोगों को रेस्क्यू किया जा रहा है। काबुल एयरपोर्ट पर अमेरिकी सैनिक तैनात हैं, और सभी देश वहां से अपने नागरिकों को बाहर निकालने की कोशिश में जुटे हुए हैं।
तालिबान की अमेरिका को चेतावनी
तालिबान ने अमेरिका को चेतावनी दी और साथ ही कहा है कि अमेरिका 31 अगस्त तक अपनी सेना अफगानिस्तान से हटा कर काबुल एयरपोर्ट खाली कर दे। अगर ऐसा नहीं होता है तो तालिबान इसे उकसावे का कदम मानेगा।
तालिबान के प्रवक्ता सुहैल शाहीन ने एक इंटरव्यू में कहा था कि 31 अगस्त ‘डेड लाइन’ है, और अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी की समय सीमा बढ़ाना उकसावे का कदम होगा। डेडलाइन को बढ़ाए जाने का फैसला तालिबान के शीर्ष नेतृत्व को करना है।






