मार्कोस या मरीन कमांडो फ़ोर्स भारत के सबसे खतरनाक और घातक कमांडो होते हैं। यह इंडियन नेवी की स्पेशल ऑपरेशन फ़ोर्स यूनिट है, भारतीय नौसेना की यह स्पेशल यूनिट फरवरी, 1987 में बनाई गई थी। इन्हें दुनिया के सभी आधुनिक हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी जाती है। उनकी ट्रेनिंग इस तरह से दी जाती है कि यह आसानी से जमीन स्तर से लेकर आसमान तक दुश्मनों का खात्मा कर सकते हैं। सोमालिया के पास हाइजैक किए गए जहाज पर मौजूद भारतीय दल को सुरक्षित निकाल लिया गया है। इस कारनामे को अंजाम दिया है, भारतीय नौसेना के जांबाज़ मरीन कमांडो मार्कोस ने। ‘एमवी लीला नॉरफॉक’ नाम के इस जहाज के हाईजैक होने की ख़बर गुरुवार की शाम मिली थी। सोमालिया के तट के पास अगवा किए गए इस जहाज पर लाइबेरिया का झंडा लगा था। भारतीय नौसेना लगातार उस जहाज पर नजर रख रही थी। और मौका मिलते ही मरीन कमांडो मार्कोस ने ऑपरेशन पूरा कर दिया। उत्तरी अरब सागर में अगवा किए गए एमवी लीला नॉरफ़ॉक जहाज पर भारतीय नौसेना ने कार्यवाही कर जहाज पर सवार 15 भारतीयों समेत चालक दल के सभी 21 सदस्यों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। मार्कोस ने पूरे जहाज पर तलाशी अभियान चलाया, इस दौरान उन्हें वहां कोई भी समुद्री लुटेरा नहीं मिला। दरअसल समुद्री लुटेरों ने उस जहाज को अगवा करने की कोशिश की थी लेकिन जब भारतीय नौसेना ने युद्धपोत से जहाज छोड़ने की चेतावनी दी तो लुटेरे उसे छोड़ कर भाग गए।
मार्कोस कमांडो की स्पेशल यूनिट इसलिए बनाई गई थी, क्योंकि उस वक्त आतंकवादी हमले और समुद्री लुटेरों का आतंक काफी तेजी से बढ़ने लगा था। उस पर काबू पाने के लिए एक स्पेशल फोर्स की जरूरत थी। उस दौरान इस यूनिट की स्थापना की गई थी। दरअसल, मार्कोस की ट्रेनिंग अमेरिकी नेवी सील्स की तरह कराई जाती है। फिलहाल, इसमें 1200 कमांडो मौजूद हैं। इनका चयन बहुत ही कठिन ट्रेनिंग के बाद किया जाता है। मार्कोस सभी प्रकार के वातावरण में काम करने में सक्षम हैं. समुद्र में, हवा में और जमीन पर। ये सभी जगह दुश्मन के लिए घातक साबित होते हैं। इस यूनिट ने धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा हासिल कर ली। मार्कोस नियमित रूप से झेलम नदी और वूलर झील में ऑपरेट करते हैं। ये झील 65 वर्ग किलोमीटर में फैली है। इस मीठे पानी की झील के ज़रिए मार्कोस जम्मू और कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियान चलाते हैं। कुछ मार्कोस इकाइयां सशस्त्र बल विशेष अभियान का एक हिस्सा हैं।






