1992 में समाजवादी पार्टी का गठन हुआ था। पार्टी ने अपना पहला लोकसभा चुनाव साल 1996 में लड़ा। इस चुनाव में ही सपा को यूपी में 16 सीटें मिलीं और 20.84% मत मिले।
लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजों में सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में मुकाबला दिलचस्प नजर आया। भाजपा और सपा-कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर रही। 2019 के मुकाबले भाजपा को बड़ा झटका लगा। वहीं, सपा वोट प्रतिशत के लिहाज से अपना सर्वश्रेठ प्रदर्शन करती दिखाई दे रही है। सीटों के हिलाज से भी अखिलेश यादव की पार्टी को बड़ा फायदा होता दिख रहा है। अखिलेश सपा के चुनावी इतिहास का सबसे बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। लोकसभा सीटों के लिहाज से सपा ऐसा प्रदर्शन मुलायम सिंह यादव के समय भी नहीं कर पाई थी।
सपा के इस प्रदर्शन के मायने
उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी करीब 37-38 सीटें जीतती दिखाई दे रही है। सत्ताधारी भाजपा को भी 32-33 के आसपास सीटें मिलने के आसार हैं। रुझान नतीजों में बदलते हैं तो ये कहा जाएगा कि सपा और कांग्रेस को गठबंधन से फायदा हुआ। दोनों दलों ने एक दूसरे को वोट ट्रांसफर भी किए। इन नतीजों के बाद उत्तर प्रदेश में विपक्ष में नया आत्मविश्वास आएग। इसके साथ ही राज्य सरकार की नीतियों और फैसलों के खिलाफ विपक्ष और आक्रामक होगा।
सपा और कांग्रेस की सीटें बढ़ने की वजह
सपा और कांग्रेस के आगे बढ़ने की एक बड़ी वजह उत्तर प्रदेश में मायावती की पार्टी बसपा का वोट शेयर घटना रहा। कभी इस पार्टी के लिए कहा जाता था कि बसपा का करीब 20 फीसदी वोटर ऐसा है जो पूरी तरह उसके साथ रहता है। इस चुनाव यह वोट शेयर घटकर नौ फीसदी के करीब रह गया। दलित वोटों का बसपा से दुराव और सपा-कांग्रेस गठबंधन की तरफ जाना भी इसकी एक वजह रही। वहीं, मुस्लिम वोटों का एकमुश्त सपा-कांग्रेस गठबंधन को वोट देने से भी इस गठबंधन को फायदा हुआ।
वोट शेयर के लिहाज से सपा का सर्वश्रेष्ठ
वोट शेयर के लिहाज से देखेंगे तो यह सपा का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। 2004 में पार्टी ने 35 सीटों पर जीत दर्ज की थी। तब उसका वोट शेयर 26.74 फीसदी रहा था। वोट शेयर के लिहाज से पार्टी का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 1998 में था जब उसे 28.7 फीसदी वोट मिले थे। उस चुनाव में पार्टी 20 सीटें जीतने में सफल रही थी। इस बार समाजवादी पार्टी को 33 फीसदी से ज्यादा वोट मिलते दिख रहे हैं। वहीं, सपा के साथ गठबंधन करके चुनाव लड़ने वाली कांग्रेस पार्टी को भी 10 फीसदी से ज्यादा वोट मिल सकता है। इस लिहाज से यह गठबंधन 43 फीसदी से ज्यादा वोट पाता दिख रहा है।



