हरिद्वार में चारों ओर गूंजे बम-बम भोले के जयकारे

कांवड़ यात्रा से हरिद्वार में चारों ओर भगवा में घूम रहे भोलों के बम-बम भोले से मानों धर्मनगरी शिवमय हो गई है। 27 जुलाई को पंचक समाप्ति के बाद मेला अपने चरम पर पहुंचने लगेगा। पुलिस के अनुसार कांवड़ मेले में अब तक 12 लाख 40 हजार से अधिक कांवड़ तीर्थ यात्री गंगा जल लेकर अपने-अपने गंतव्यों को रवाना हो चुके हैं। कांवड़ मेले के तीसरे दिन धर्मनगरी भगवामय हो गई। चहुं ओर भगवा में घूम रहे भोलों के बम-बम भोले से मानों धर्मनगरी शिवमय हो गई। पंचक लगने के बाद भी कांवड़ तीर्थ यात्रियों के आने और जाने का क्रम दिन भर बना रहा। हरकी पैड़ी और आसपास के गंगा घाटों पर सिर्फ भगवा ही नजर आ रहा है। पुलिस के अनुसार कांवड़ मेले में अब तक 12 लाख 40 हजार से अधिक कांवड़ तीर्थ यात्री गंगा जल लेकर अपने-अपने गंतव्यों को रवाना हो चुके हैं।
पंचक समाप्ति के बाद चरम पर पहुंचेगा मेला
27 जुलाई को पंचक समाप्ति के बाद मेला अपने चरम पर पहुंचने लगेगा। अभी कांवड़ मेले के जोर पकड़ने में तीन दिन बाकी हैं। पर, हर बीतते समय के साथ हरिद्वार पहुंच रही कांवड़ यात्रियों की भीड़ उनके जोश, उमंग, उत्साह और आस्था की अलग कहानी कह रही है। हाईवे, कांवड़ पटरी के साथ-साथ शहर के अन्य मार्गों से कांवड़ यात्रियों की वापसी का क्रम अबाध गति से जारी है। आकर्षक कांवड़ उठाए कांवड़ यात्री ही हर कहीं नजर आ रहे हैं। पैरों के साथ-साथ कांवड़ में भी घुंघरू बांधी हुई है। झालर-झंडी से सजाई कांवड़ सभी के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। हरकी पैड़ी, मालवीय द्वीप, पंतद्वीप, मोती बाजार और अपर रोड आदि इलाकों में हर तरफ यही नजर आ रहे हैं। आश्रम, अखाड़ों, धर्मशालाओं में भी इन्हीं की भीड़ उमड़ी पड़ी है। सुबह से शाम धर्मनगरी के मंदिरों में पूजा-अर्चना और देवदर्शन करने के बाद गंगा पूजन कर गंगाजल भर कांवड़ यात्री अपने-अपने गंतव्य को रवाना हो रहे हैं। हाईवे पर बड़ी-बड़ी कांवड़ लेकर जा रहे कांवड़ यात्रियों और कांवड़ को देखने के लिए स्थानीय निवासियों की भीड़ उमड़ रही है। हरकी पैड़ी क्षेत्र, मोती बाजार, कनखल, शंकराश्रम चौक समेत अन्य जगहों पर धामिक सामग्री की दुकानों सजी हुई हैं। जहां आकर्षक शिव-पार्वती की मूर्ति से लेकर घुंघरू, गंगाजली, प्रसाद आदि उपलब्ध हैं। धार्मिक पुस्तकें भी दुकानों में शिव भक्तों के लिए उपलब्ध हैं। रुद्राक्ष समेत अन्य मालाएं, नग, भजन की भी बाजार में भरमार है। आडियो और वीडियो दोनों तरह की सीडी और पेन ड्राइव बाजार में उपलब्ध है और इनकी बिक्री हो रही है।
गंगाजली और कलश की भारी मांग
कांवड़ यात्रा के आरंभ होने के साथ ही गंगाजली, कलश व गागर की मांग बढ़ गई है। तांबे, स्टील, पीतल के कलश व गागर की मांग सबसे ज्यादा है। कांवड़ मेला में आने वाले कांवड़ यात्रियों में स्टील, तांबे और पीतल के कलश में गंगाजल ले जाने की परंपरा जोर पकड़ती जा रही है। इसके मद्देनजर इन दिनों हरिद्वार के बाजारों में इनकी मांग बढ़ गई है। इसके साथ ही प्लास्टिक की गंगाजली की मांग भी बढ़ गई है।

विशिखा मीडिया

विशिखा ने जनवरी 2019 से राजस्थान की राजधानी जयपुर से हिंदी मासिक पत्रिका के रूप में अपनी नींव रखी। राजस्थान में सफलता का परचम फहराने के बाद विशिखा प्रबंधन ने अप्रैल 2021 से उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से मासिक पत्रिका के रूप में अपना प्रकाशन आरम्भ करने का निर्णय लिया। इसी बीच लोगों की प्रतिक्रियाएं आईं कि विशिखा का प्रकाशन दैनिक समाचार पत्र के रूप में भी होना चाहिये। पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए विशिखा प्रबंधन ने 1 जनवरी 2022 से जयपुर से दैनिक समाचार पत्र के रूप में भी अपना प्रकाशन आरम्भ किया। विशिखा में प्रमुख रूप से राजनैतिक गतिविधियों सहित, कला, समाज, पर्यटन, एवं अन्य विषयों से संबंधित विस्तृत आलेख प्रकाशित होते हैं। विशिखा पत्रिका ने अपने विस्तृत आलेखों और दैनिक न्यूज़ विश्लेषण के माध्यम से अपने पाठकों को जानकारी और ज्ञान की दुनिया में ले जाने का महत्वपूर्ण काम किया है। अपनी सटीक खबरों, विस्तृत रिपोर्टों और विशेष विषयों पर आधारित लेखों के साथ, विशिखा ने लगातार अपनी विश्वसनीयता बनायी हुई है। विशिखा मासिक पत्रिका की खबरों की गुणवत्ता, नवीनता और सटीकता को ध्यान में रखते हुए इस पत्रिका ने अपने पाठकों का दिल जीता है। यह पत्रिका न केवल जानकारी उपलब्ध कराती है, बल्कि लोगों के बीच अपने विचारों के आदान प्रदान के लिए एक मंच भी उपलब्ध करती है। इसके लेखक, संपादक और टीम का प्रयास निरंतर यह होता है कि पाठकों को एक अच्छा अनुभव देने के साथ-साथ सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक मुद्दों के साथ-साथ समस्याओं के समाधान पर ध्यान केंद्रित करें। विशिखा का लक्ष्य आपको विभिन्न विषयों पर अद्भुत लेखों से परिचित कराना है। पत्रिका के माध्यम से हम लेखकों, संगठनों, एवं समाज के प्रतिष्ठित और सामान्य लोगों को उनकी रचनात्मक योग्यताओं के आधार पर साझा करने का प्रयास करना है। पत्रिका टीम का मूल मंत्र है- रचनात्मकता, नैतिकता और उच्चतम गुणवत्ता। विशिखा हिंदी मासिक पत्रिका है जो 2019 में शुरू हुई थी। वर्तमान में यह राजस्थान और उत्तराखंड से प्रकाशित की जाती है। इसमें विभिन्न विषयों पर लेख शामिल होते हैं जैसे कि करंट अफेयर्स, साहित्य, महिलाएं, यात्रा और अधिक। हमारी पत्रिका उन लोगों के लिए है जो ज्ञान और सूचना की तलाश में होते हैं और उन्हें उन विषयों से रुबरु कराने का एक मंच प्रदान करती हैं।

Leave a Reply

Discover more from

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading