राजस्थान की भजनलाल सरकार ने राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में कर्मचारी कल्याण, कृषकों के हित, विद्युत प्रणाली को मजबूत करने और रेल परिवहन के विकास जैसे कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। ये बैठक मुख्यमंत्री कार्यालय में आयोजित की गई थी, जिसमें इन मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया। उप मुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा और संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन फैसलों की जानकारी दी।
राजस्थान सिविल सेवा (चिकित्सा परिचर्या) नियम, 2013 में संशोधन:
- राज्य कर्मचारियों के लाभ के लिए ग्रेच्युटी और डेथ ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा 20 लाख रुपये से बढ़ाकर 25 लाख रुपये करने को मंजूरी दी गई है।
- अब पुरुष और महिला कर्मचारियों को सीजीएचएस की तर्ज पर आरजीएचएस में चिकित्सा सुविधा के लिए माता-पिता या सास-ससुर में से किसी एक को शामिल करने का विकल्प मिलेगा, बशर्ते वे आश्रित हों और कर्मचारी के साथ रह रहे हों।
- इस संबंध में बजट वर्ष 2024-25 की घोषणा के तहत राजस्थान सिविल सेवा (चिकित्सा परिचर्या) नियम, 2013 के नियम 3(9) में संशोधन किया जाएगा।
केंद्रीय कर्मचारियों की तर्ज पर 10 वर्षों तक बढ़ी हुई दर से पारिवारिक पेंशन का लाभ: - कर्मचारी की सेवा के दौरान मृत्यु होने पर आश्रितों को अब केंद्रीय कर्मचारियों की तरह 10 वर्षों तक बढ़ी हुई दर से पारिवारिक पेंशन का लाभ मिलेगा। इस प्रावधान के लिए राजस्थान सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1996 के नियम 55 और 62 में संशोधन की अधिसूचना 1 अप्रैल 2024 से प्रभावी होगी।
- एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय के तहत, राजस्थान जिला न्यायालय लिपिक वर्गीय स्थापन नियम 1986 के नियम 14ए और 20 के उपनियम 4, और राजस्थान अधीनस्थ न्यायालय (चालक और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी) सेवा नियम, 2017 के नियम 18 के उपनियम 4 और नियम 30 में संशोधन की मंजूरी दी गई है। इन संशोधनों से न्यायालयों के लिपिकीय कर्मचारियों, चालकों और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को राहत मिलेगी, जो दो से अधिक संतान होने के कारण पदोन्नति से वंचित रह गए थे।
- अब उनकी पदोन्नति उस तिथि से विचार की जा सकेगी, जब वे इसके योग्य थे और उन्हें नोशनल वेतनवृद्धि भी दी जा सकेगी।






