अब नहीं खुलेंगी सरिस्का की बंद खानें- सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार द्वारा दाखिल एफिडेविट को खारिज कर दिया है और सरिस्का क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट (सीटीएच) के एक किलोमीटर के दायरे में बंद की गई 100 खदानों को फिर से खोलने की अनुमति नहीं दी है। राजस्थान सरकार को इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है, क्योंकि अब सरिस्का सीटीएच के आसपास की ये खदानें नहीं खुलेंगी। सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय बेंच ने यह फैसला सुनाया और कहा कि पहले दिए गए आदेश प्रभावी रहेंगे। इसके साथ ही, कोर्ट ने इस मामले को खत्म कर दिया। कोर्ट के ये आदेश सरिस्का सीटीएच से एक किलोमीटर के दायरे में चल रही अन्य व्यावसायिक गतिविधियों पर भी लागू होंगे।
इस मामले की सुनवाई जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस केवी विश्वनाथन ने की। सुनवाई के दौरान, राज्य सरकार के वकील ने कोर्ट को बताया कि 15 मई 2024 को जारी आदेश केवल राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभयारण्यों पर लागू हैं, सरिस्का टाइगर रिजर्व के सीटीएच पर नहीं। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पहले दिए गए आदेश सरिस्का पर भी लागू होते हैं। कोर्ट ने कहा कि सरिस्का टाइगर रिजर्व के सीटीएच के एक किलोमीटर के दायरे में आने वाली 57 सक्रिय खदानें और 43 बंद खनन पट्टों की गतिविधियां नहीं चल सकतीं। सरकार ने खुद ही बताया था कि ये खदानें बंद कर दी गई हैं, इसलिए आगे किसी आदेश की आवश्यकता नहीं है। इसी के साथ मामला समाप्त कर दिया गया।
सरिस्का के आसपास सबसे अधिक खदानें टहला रेंज, झिरी, अजबगढ़, थानागाजी और तिलवाड़ क्षेत्रों में चलती थीं। यहां से निकाले गए मार्बल की आपूर्ति दूर-दूर तक की जाती थी, जिससे सरकार को अच्छा रेवेन्यू मिलता था और हजारों लोगों को रोजगार भी मिलता था। अब खदानें बंद होने के बाद, सरकार को अन्य व्यावसायिक गतिविधियों को भी बंद कराना होगा। इस आदेश का असर होटल-रेस्टोरेंट के संचालन पर भी पड़ेगा। पहले भी सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी ने सरिस्का सीटीएच से एक किलोमीटर के दायरे में व्यावसायिक गतिविधियों को बंद करने का आदेश दिया था, लेकिन सरकार और प्रशासन अब तक इन्हें लागू नहीं कर पाए थे। कोर्ट के नए आदेश के बाद होटल संचालकों में चिंता का माहौल है.

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