रालोद प्रमुख जयंत चौधरी ने भाजपा को बड़ा झटका दिया है। जयंत चौधरी की पार्टी रालोद अब स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। पार्टी के महासचिव त्रिलोक त्यागी ने इसका संकेत दिया है। लोकसभा चुनाव 2024 में भाजपा का समर्थन करने वाली रालोद ने अब विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा से अलग होने का फैसला कर लिया है। इसके लिए जयंत चौधरी ने पूरी रणनीति भी बना ली है और 23 स्टार प्रचारकों की सूची जारी कर इस बात की पुष्टि कर दी है। रालोद जम्मू-कश्मीर में 15-20 सीटों पर अलग चुनाव लड़ने जा रही है। अगर यह योजना सफल होती है तो जम्मू-कश्मीर के विधानसभा चुनाव काफी रोचक हो जाएंगे।
दरअसल, केंद्र सरकार में मंत्री जयंत चौधरी ने लोकसभा चुनाव में भाजपा के साथ गठबंधन किया था और उन्हें केंद्र की एनडीए सरकार में मंत्री पद भी मिला है। लेकिन अब रालोद ने भाजपा से दूरी बनाने का फैसला किया है। रालोद जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव में भाजपा से अलग होकर अपनी राह चुन रही है। इसके लिए त्रिलोक त्यागी ने 23 स्टार प्रचारकों की सूची भी जारी कर दी है, जिसमें पार्टी अध्यक्ष जयंत चौधरी, उत्तर प्रदेश के सांसद चंदन चौहान, राजकुमार सांगवान और छपरौली के विधायक भी शामिल हैं। जम्मू-कश्मीर की 90 विधानसभा सीटों पर चुनाव की घोषणा हो चुकी है। सूत्रों के अनुसार, रालोद उन सीटों पर ध्यान केंद्रित कर रही है जहां ओबीसी और पिछड़े वर्ग के मतदाता अधिक हैं, साथ ही पार्टी मुस्लिम वोट बैंक को भी लक्षित कर रही है। त्रिलोक त्यागी ने कहा कि रालोद का किसी भी पार्टी के साथ गठबंधन नहीं है और वह भाजपा से अलग होकर चुनाव लड़ेगी। रालोद के चुनावी मैदान में उतरने से जम्मू-कश्मीर का चुनाव और दिलचस्प हो जाएगा। जम्मू-कश्मीर में तीन चरणों में चुनाव होंगे, पहले चरण में 24 सीटों पर 18 सितंबर को, दूसरे चरण में 26 सीटों पर 25 सितंबर को और तीसरे चरण में 40 सीटों पर मतदान होगा। नतीजे 8 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे।
इस चुनाव में कांग्रेस उमर अब्दुल्ला की पार्टी एनसी के साथ गठबंधन में है, जबकि भाजपा दूसरी प्रमुख पार्टी है। भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर मानी जा रही है, जबकि महबूबा मुफ्ती की पीडीपी, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी भी चुनावी मैदान में उतर रही हैं। रालोद की एंट्री से चुनावी मुकाबला और कड़ा होने की संभावना है। जम्मू-कश्मीर में 10 साल बाद विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। पिछली बार 2014 में चुनाव हुए थे, जिसमें भाजपा और पीडीपी ने मिलकर सरकार बनाई थी, लेकिन 2018 में गठबंधन टूटने के बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू हो गया। 2019 में आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर दो केंद्र-शासित प्रदेशों में विभाजित हो गया। अब 10 साल बाद फिर से विधानसभा चुनाव हो रहे हैं, जिनमें बहुमत की सरकार बनाने के लिए 46 सीटों पर जीत हासिल करनी होगी। सपा ने भी जम्मू-कश्मीर चुनाव में 37 सीटों पर उम्मीदवार उतारने का ऐलान किया है। सपा ने अपने उम्मीदवारों के नाम लगभग फाइनल कर दिए हैं और प्रदेश अध्यक्ष जियालाल वर्मा ने इन सीटों की घोषणा की है, जिनमें बड़गाम, श्रीनगर, बारामुला, चिरार ए शरीफ, उड़ी, हजरतबल, और ईदगाह आदि शामिल हैं।
जयंत चौधरी ने की जम्मू-कश्मीर में 20 सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा, बीजेपी से नहीं करेगी गठबंधन




