केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने संसद में घोषणा की थी कि अब दो टोल प्लाजा के बीच की दूरी कम से कम 60 किलोमीटर होगी। हालांकि, ऐसा कुछ होता नजर नहीं आ रहा है। देशभर में टोल का खेल बिना किसी रोक-टोक के जारी है। कुछ स्थानों पर लागत से अधिक वसूली के बाद भी सालों से जनता को ठगा जा रहा है, तो कहीं 60 किलोमीटर की निर्धारित सीमा के भीतर ही कई टोल प्लाजा बना दिए गए हैं।
नितिन गडकरी ने संसद में कहा था कि यदि दो टोल प्लाजा के बीच की दूरी 60 किलोमीटर से कम है, तो एक टोल को हटाया जाएगा और तीन महीने के अंदर ऐसे सभी टोल प्लाजा खत्म कर दिए जाएंगे। लेकिन ऐसा अभी तक नहीं हुआ है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने अपने मंत्री के इस बयान को गंभीरता से नहीं लिया। गडकरी की घोषणा के ढाई साल बीत जाने के बाद भी इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
जांच में सामने आया है कि कुछ राष्ट्रीय राजमार्गों पर सिर्फ 20 किलोमीटर के फासले पर दो टोल प्लाजा बने हुए हैं। यानी 20 किलोमीटर की यात्रा के दौरान लोगों को दो बार टोल देना पड़ता है, जिससे आम जनता पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
22 मार्च, 2022 को संसद में नितिन गडकरी ने कहा था कि 60 किमी के बीच में टोल नहीं आता है और कुछ जगह चालू है। मैं आज सदन को विश्वास दिलाता हूं कि यह बहुत बार गलत काम हो रहा है, गैर कानूनी है। मैं बार-बार कहता हूं लेकिन पैसे मिलते हैं इसलिए विभाग कहता है, हां करते हैं… हां करते हैं… अब मैं बता रहा हूं कि इसके बाद तीन महीने के अंदर 60 किमी के अंदर एक ही टोल नाका होगा, यदि दूसरा होगा तो उसे बंद किया जाएगा। हमें पैसा भी चाहिए लेकिन लोगों को तकलीफ नहीं देनी चाहिए।
जनता को लूट रहा एनएचएआई, नितिन गडकरी के आदेश हुए हवा






