हाई कोर्ट से मृत्यदंड की सजा पाये हत्या के आरोपी को सुप्रीम कोर्ट ने किया बरी

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक आरोपी को बरी कर दिया, जिसने अपनी मां, पत्नी और दो वर्षीय बेटी की हत्या की थी। सैशन कोर्ट ने उसे मौत की सजा सुनाई थी, जिसे हाईकोर्ट ने भी मंजूरी दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष घटनाओं की एक निरंतर श्रृंखला को साबित करने में असफल रहा है। हत्या के आरोपी विश्वजीत कर्बा मसलकर को आईपीसी की धारा 302, 307 और 201 के तहत ट्रायल कोर्ट द्वारा दोषी ठहराया गया था, जहां उसे मृत्युदंड की सजा सुनाई गई थी। बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी इस मामले को “दुर्लभतम में से दुर्लभतम” मानते हुए मृत्युदंड की पुष्टि की थी।
जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने आदेश सुनाते हुए कहा कि यह एक परिस्थितिजन्य साक्ष्य का मामला है और अभियोजन पक्ष घटनाओं को क्रमवार साबित नहीं कर पाया, इसलिए आरोपी विश्वजीत कर्बा मसलकर की अपील को स्वीकार किया गया। हाईकोर्ट ने सैशन कोर्ट द्वारा सुनाई गई मृत्युदंड की सजा को बरकरार रखते हुए कहा था कि परिवार का नाश करके आरोपी ने समाज की मूलभूत नींव को तोड़ने की कोशिश की है। इस मामले ने अदालत की न्यायिक अंतरात्मा को झकझोर दिया है, इसलिए इसे दुर्लभतम मामले के रूप में माना जाना चाहिए। शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में कहा कि मृत्युदंड की सजा के लिए दुर्लभतम मामले की जांच समाज की धारणा पर निर्भर करती है और दृष्टिकोण समाज-केंद्रित होना चाहिए, न कि जज-केंद्रित।
मामले का विवरण:
ट्रायल कोर्ट के बाद, जब हाईकोर्ट ने भी कर्बा मसलकर के खिलाफ मृत्युदंड की सजा को बरकरार रखा, तब उसने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कर्बा मसलकर पुणे की एक कंपनी में काम करता था और उसने पुलिस को बताया था कि उसके घर में चोरी हुई और इसी दौरान उसकी मां, पत्नी और दो वर्षीय बेटी की मौत हो गई। उसने यह भी बताया कि इस घटना में उसके पड़ोसी को चोटें आई थीं। थाने में इस मामले की शिकायत आईपीसी की धारा 302 और 397 के तहत दर्ज की गई। पुलिस की जांच के दौरान यह पाया गया कि घर में कुछ भी चोरी नहीं हुआ और न ही किसी के जबरन प्रवेश की कोशिश की गई। इसके बाद पुलिस का ध्यान पूरी तरह से मसलकर पर केंद्रित हो गया। पुलिस को शक क्यों न होता? जांच के दौरान पता चला कि मसलकर का एक अन्य महिला से विवाहेतर संबंध था। पुलिस की इस जांच के आधार पर ट्रायल कोर्ट ने उसे हत्या का दोषी पाया और मृत्युदंड की सजा दी। मसलकर ने हाईकोर्ट में इस सजा के खिलाफ अपील की, और वहां भी सजा बरकरार रही। अब उसके पास सुप्रीम कोर्ट की शरण में जाने के सिवाय कोई और विकल्प नहीं था। मसलकर की किस्मत देखिए कि सुप्रीम कोर्ट ने उसके खिलाफ मृत्युदंड की सजा को खारिज कर उसे बरी कर दिया।

विशिखा मीडिया

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