भारत और चीन के रिश्तों में पिछले कुछ वर्षों से, विशेषकर वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तनाव बना हुआ है। हाल ही में, दोनों देशों के बीच सैनिकों को पीछे हटाने और पेट्रोलिंग शुरू करने के लिए एक नया समझौता हुआ है, जो देपसांग और डेमचोक क्षेत्रों से संबंधित है। इस समझौते के बाद, उम्मीद जताई जा रही है कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक हो सकती है, जिसमें एलएसी मुद्दे पर चर्चा होगी।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच हो रहा है, जिससे भारत और चीन की यह संभावित बैठक और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। भारत हमेशा से शांति और कूटनीति के जरिए विवादों के समाधान की वकालत करता रहा है। यदि यह बैठक होती है, तो इसमें न केवल एलएसी पर तनाव कम करने के लिए बातचीत हो सकती है, बल्कि एशिया में स्थिरता को लेकर भी महत्वपूर्ण फैसले लिए जा सकते हैं।
साल 2020 से भारत और चीन के बीच सीमा विवाद के कारण रिश्तों में खटास आई थी, लेकिन यह बातचीत दोनों देशों के संबंधों में सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकती है। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच संभावित मुलाकात निश्चित रूप से भारत-चीन संबंधों के लिए महत्वपूर्ण होगी। यह एलएसी विवाद पर बातचीत के लिए दोनों देशों के बीच तनाव को कम करने और बेहतर संबंध स्थापित करने का एक अहम मौका हो सकता है। हाल ही में हुए समझौतों से उम्मीद है कि बातचीत का सकारात्मक माहौल बनेगा।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भारत और चीन के बीच न सिर्फ सीमा विवाद पर बल्कि वर्तमान वैश्विक संकटों के संदर्भ में क्षेत्रीय स्थिरता पर भी चर्चा हो सकती है। इस मुलाकात से न सिर्फ द्विपक्षीय संबंधों में सुधार हो सकता है, बल्कि एशिया में शांति और सहयोग की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम उठाया जा सकता है। अगर यह बैठक होती है, तो इसके परिणाम क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर व्यापक हो सकते हैं।
ब्रिक्स समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग में हो सकती है बातचीत






