‘प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट-1991’: सुप्रीम कोर्ट के आदेश से शांति बनी रहेगी – अशोक गहलोत

‘प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट-1991’ की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस विषय पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूजा स्थलों अधिनियम को लेकर धार्मिक स्थलों पर नए वाद दायर करने और अदालत के किसी भी निर्णय पर रोक लगाने का आदेश स्वागतयोग्य है। अशोक गहलोत ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा कि यह आदेश उन सांप्रदायिक ताकतों पर अंकुश लगाएगा जो राजनीतिक लाभ के लिए इस तरह की याचिकाएं दायर कर देश में तनाव फैलाने की कोशिश कर रही थीं। यह निर्णय शांति बनाए रखने में सहायक होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने पूजा स्थलों अधिनियम, 1991 की वैधता को चुनौती देने वाली जनहित याचिकाओं की सुनवाई के दौरान कहा कि जब तक केंद्र सरकार का जवाब दाखिल नहीं हो जाता, तब तक इस मामले पर कोई सुनवाई नहीं होगी। चीफ जस्टिस संजीव खन्ना ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार को चार हफ्तों में अपना जवाब दाखिल करना होगा। यह कानून 15 अगस्त, 1947 को पूजा स्थलों की धार्मिक स्थिति को जस का तस बनाए रखने का प्रावधान करता है और इन स्थलों के स्वरूप को बदलने या उनके स्वामित्व को लेकर नए मुकदमे दायर करने पर रोक लगाता है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि अगली सुनवाई तक नई याचिकाएं दायर की जा सकती हैं, लेकिन उन्हें रजिस्टर नहीं किया जाएगा। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की उस मांग को खारिज कर दिया, जिसमें देशभर की अदालतों में इससे जुड़े मामलों पर रोक लगाने की अपील की गई थी।
राजस्थान के अजमेर में सिविल न्यायालय पश्चिम में हाल ही में हिंदू सेना के अध्यक्ष विष्णु गुप्ता द्वारा दरगाह शरीफ में मंदिर होने का दावा करते हुए याचिका दायर की गई थी। इस मामले में अदालत ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है, और अगली सुनवाई 20 दिसंबर को निर्धारित की गई है। अब देखना होगा कि सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश का इस मामले पर क्या प्रभाव पड़ता है।

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