कुवैत के सर्वोच्च सम्मान, ‘द ऑर्डर ऑफ मुबारक अल कबीर’ से हुए सम्मानित हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को दो दिवसीय दौरे पर खाड़ी देश पहुंचे, जहां उनका भव्य स्वागत किया गया। कुवैत में प्रथम उप प्रधानमंत्री और रक्षा एवं आंतरिक मंत्री शेख फहद यूसुफ सऊद अल-सबा सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने गर्मजोशी से उनका स्वागत किया। 43 वर्षों के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री के कुवैत आने पर भारतीय प्रवासियों ने भी शानदार स्वागत किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कुवैत में ‘हाला मोदी’ (स्वागत मोदी) कार्यक्रम को संबोधित किया, जिसमें 5000 से अधिक भारतीय प्रवासी शामिल हुए। भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि कुवैत में भारत के लोगों की विविधता देखकर उन्हें “लघु हिंदुस्तान” का अनुभव हो रहा है। यात्रा से पहले पीएम मोदी ने कहा था कि भारत कुवैत के साथ ऐतिहासिक संबंधों को बेहद महत्व देता है। दोनों देशों के बीच मजबूत व्यापार और ऊर्जा साझेदारी है, साथ ही क्षेत्रीय शांति और स्थिरता में भी साझा रुचि है।
कुवैत सिटी में शेख साद अल अब्दुल्ला इंडोर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में प्रवासी भारतीयों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि कुवैत पहुंचने के कुछ ही समय में उन्हें अद्वितीय आत्मीयता और गर्मजोशी का एहसास हुआ। उन्होंने इसे व्यक्तिगत रूप से खास क्षण बताया, क्योंकि चार दशकों के बाद कोई भारतीय प्रधानमंत्री कुवैत आया है। कुवैत पहुंचने पर प्रधानमंत्री ने रामायण और महाभारत के अरबी अनुवादकों से मुलाकात की और उनके कार्यों की सराहना की। उन्होंने इस अनुवाद कार्य को भारत-कुवैत सांस्कृतिक संबंधों की महत्वपूर्ण कड़ी बताया। भारतीय दूतावास के आंकड़ों के अनुसार, कुवैत की कुल आबादी का 21% और कार्यबल का 30% हिस्सा भारतीय समुदाय का है। 2023 तक यहां 10 लाख से अधिक भारतीय रह रहे थे, जिनमें से अधिकांश दक्षिण भारतीय राज्यों से हैं। कुवैत भारत के लिए कच्चे तेल का छठा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है और यह भारत की ऊर्जा जरूरतों का 3% पूरा करता है। 2023-24 में भारत और कुवैत के बीच द्विपक्षीय व्यापार 10.47 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया।
प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा को खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के देशों के साथ भारत के संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। GCC के साथ भारत का व्यापार 2022-23 में 184.46 बिलियन डॉलर तक पहुंचा, जो इस क्षेत्र की रणनीतिक और आर्थिक महत्ता को दर्शाता है। ऐतिहासिक रूप से भारत की विदेश नीति दक्षिण एशिया और प्रमुख शक्तियों पर केंद्रित रही है, जबकि कुवैत के साथ संबंधों को प्राथमिकता नहीं दी गई। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 1981 में कुवैत का दौरा किया था, जो पिछले 43 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की अंतिम यात्रा थी।
प्रधानमंत्री मोदी के कुवैत दौरे के मुख्य कार्यक्रमों में 26वें अरेबियन गल्फ कप के उद्घाटन समारोह में भाग लेना, भारतीय समुदाय के एक लेबर कैंप का दौरा और कुवैत के शीर्ष नेतृत्व के साथ बैठक शामिल हैं।





