नागा संन्यासियों ने 21 शृंगार कर महाकुंभ के पहले अमृत स्नान में हिस्सा लिया। दीक्षा के दिगंबर वेश धारण कर, इष्टदेव महादेव की तरह अपने शृंगार को दर्शाया। नागा साधुओं का यह विशेष शृंगार श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र बना रहा। नख से शिख तक भभूत में लिपटे, जटाजूट की वेणी बांधे, आँखों में सूरमा, हाथों में चिमटा और डमरू लिए साधु त्रिवेणी के तट पर पहुंचे और अमृत स्नान की पहली डुबकी लगाई। महाकुंभ में 21 शृंगार का यह विशेष आयोजन केवल शरीर का ही नहीं, मन और वचन का भी शृंगार था। यह दिखावे के लिए नहीं, बल्कि महादेव को प्रसन्न करने के लिए साधुओं द्वारा आंतरिक रूप से अनुभव किया जाता है। महानिर्वाणी अखाड़े के शंकरपुरी महाराज ने बताया कि हिंदू परंपरा में जहां सुहागिनें 16 शृंगार करती हैं, वहीं नागा साधु 21 शृंगार के साथ अमृत स्नान करते हैं। भभूत जीवन की क्षणभंगुरता का प्रतीक है, चंदन हलाहल पान करने वाले शिव को समर्पित है, और रुद्राक्ष शिव के आंसुओं से उत्पन्न हुआ माना जाता है। सूरमा, कड़े, चिमटा, त्रिशूल और कमंडल नागा साधुओं की पहचान हैं।
महाकुंभ 2025 में किन्नर अखाड़ा भी आकर्षण का केंद्र रहा। आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी के नेतृत्व में किन्नर अखाड़े ने समाज कल्याण की कामना के साथ अमृत स्नान किया। तलवारों और शस्त्रों के प्रदर्शन के साथ जयघोष और हर-हर महादेव के नारों ने आयोजन में उत्साह और आस्था भर दी। किन्नर अखाड़े ने अपने प्रदर्शन और संदेश से महाकुंभ को एक विशेष छवि प्रदान की।
साथ ही, ओम नमः शिवाय संस्था महाकुंभ के सात सेक्टरों में श्रद्धालुओं को 24 घंटे निशुल्क भोजन उपलब्ध करा रही है। हर दिन 20 से 25 हजार लोगों को भोजन कराते हुए, यह संस्था ‘एक भी व्यक्ति बिना खाए न रहे’ का संदेश दे रही है।
महाकुम्भ 2025: शृंगार कर नागा संन्यासियों ने अमृत स्नान की लगाई डुबकी






