प्रभु श्रीराम की जन्मस्थली पर प्राण-प्रतिष्ठा का महोत्सव पवित्र ऐतिहासिक क्षण है। सभी सनातन धर्मावलंबी उस दिन रामचरित मानस में गोस्वामी तुलसीदास द्वारा उल्लिखित पंक्ति ‘नाथ सकल संपदा तुम्हारी, मैं सेवक समेत सुत नारी’ के भाव से उस क्षण का साक्षी बन सकें, इसके लिए केंद्र सरकार द्वारा 22 जनवरी को पूरे देश में सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की जानी चाहिए। काशी के संतों ने इस मांग का पुरजोर समर्थन किया है। अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने प्रधानमंत्री मोदी को लिख गये पत्र में कहा है कि 500 वर्षो से मंदिर निर्माण को लेकर संघर्ष किया गया है। प्रभु श्रीराम के मंदिर में रामलला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल होंगे। तो इस ऐतिहासिक पल का भारत का हर नागरिक साक्षी बन सके। अगर देश में इस ऐतिहासिक दिन सार्वजनिक अवकाश घोषित नहीं किया गया। तब सनातन धर्मावलंबी हिंदू समाज इस दिव्य पल को देखने से वंचित रह जाएगा।
समिति के महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने पत्र में यह भी लिखा है कि जब मंदिर के प्रथम तल पर भगवान रामलला अपनी जन्मभूमि पर विराजेंगे। उस समय पूरे विश्व में सनातन धर्मावलंबी उत्सव मना रहे होंगे। पत्र में कहा गया है कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राम जन्मभूमि के गर्भगृह में बैठकर आचार्यों के साथ प्राण-प्रतिष्ठा कर रहे होंगे। उस समय पूरी दुनिया श्रीराम जन्मभूमि को पवित्र भाव से लाइव देख रही होगी। ऐसे में कोई भी इस दिव्य क्षण को देखने से वंचित न जाए। ऐसे में संत समाज के लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से देश में 22 जनवरी 2024 को सार्वजनिक अवकाश की घोषणा करने की मांग की है। उन्होंने कहा श्री रामचरितमानस की उक्ति मैं सेवक समेत सुत नारी… का भाव अधूरा रह जाएगा। इन 500 वर्षों के संघर्षों के समापन तथा भारत राष्ट्र के परमवैभव के प्रारंभ काल के ऐतिहासिक क्षणों का साक्षी बनने के लिए लोगों का सपरिवार घर और मंदिरों में होना आवश्यक है। यह अवकाश घोषित होना संविधान के मूल अधिकार में उल्लिखित धार्मिक-स्वतंत्रता के हमारे अधिकार को भी पोषित करेगा।






