डोनाल्ड ट्रंप के फैसले के अनुसार, अब अमेरिका अगले 12 महीनों के भीतर संयुक्त राष्ट्र की स्वास्थ्य एजेंसी, डब्लूएचओ (विश्व स्वास्थ्य संगठन), को छोड़ देगा और उसे दी जाने वाली वित्तीय सहायता भी समाप्त कर देगा।
अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने कार्यकाल की शुरुआत एक बड़े फैसले के साथ की, जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया। ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर करते हुए अमेरिका को डब्लूएचओ से बाहर निकालने का निर्णय लिया। ट्रंप ने कहा कि डब्लूएचओ ने अमेरिका को धोखा दिया है और हर कोई अमेरिका का फायदा उठाता है। हालांकि, डब्लूएचओ की ओर से इस पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
डब्लूएचओ पर पड़ेगा वित्तीय दबाव
डोनाल्ड ट्रंप के इस कदम का अर्थ है कि अमेरिका न केवल डब्लूएचओ से अलग हो जाएगा, बल्कि उसे दी जाने वाली वित्तीय मदद भी बंद कर देगा। अमेरिका अब तक डब्लूएचओ का सबसे बड़ा वित्तीय सहयोगी था, जो इसके कुल बजट का लगभग 18% योगदान देता था। डब्लूएचओ का 2024-2025 के लिए दो वर्षों का हालिया बजट 6.8 बिलियन डॉलर था।
डब्लूएचओ से अलग होने के अपने फैसले को लेकर ट्रंप ने कहा कि संगठन ने कोरोना वायरस (COVID-19) और अन्य अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संकटों को सही तरीके से नहीं संभाला। उनका कहना है कि डब्लूएचओ सदस्य देशों के राजनीतिक प्रभाव में आकर स्वतंत्र निर्णय लेने में विफल रहा है। इसके बावजूद, वह अमेरिका से भारी वित्तीय योगदान की मांग करता रहा है, जो चीन जैसे अन्य देशों की तुलना में अनुपातहीन है।






