चीन में वैज्ञानिकों की एक टीम ने एक नए प्रकार के कोरोनावायरस की खोज की है, जो तेजी से फैलने का जोखिम पैदा कर सकता है। यह नया कोरोनावायरस भी पिछले वायरस (SARS-CoV-2) की तरह चमगादड़ों में पाया गया है।
साल 2019 के अंतिम महीनों में चीन से शुरू हुए नोवेल कोरोनावायरस का संक्रमण लगभग तीन साल तक वैश्विक स्तर पर गंभीर चिंता का कारण बना रहा। फिलहाल, संक्रमण के मामले काफी हद तक नियंत्रित हैं, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि वायरस की प्रकृति को देखते हुए इसमें नए म्यूटेशन और किसी नए वैरिएंट के उभरने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। भले ही कोविड-19 के मामले अब कम हो गए हैं, लेकिन इसे पूरी तरह समाप्त मानना उचित नहीं होगा।
जब दुनिया अभी कोविड-19 के प्रभावों से पूरी तरह उबर भी नहीं पाई थी, तब चीन से सामने आई यह नई जानकारी एक बार फिर चिंता बढ़ाने वाली है। चीन में वैज्ञानिकों ने एक नए प्रकार के कोरोनावायरस की पहचान की है, जिसमें तेज़ी से फैलने की संभावना जताई गई है। शोधकर्ताओं के अनुसार, इस वायरस की प्रकृति कई मामलों में SARS-CoV-2 से मिलती-जुलती है और यह भी संक्रमण फैलाने के लिए मानव रिसेप्टर का उपयोग करता है। इस संभावित खतरे को देखते हुए विशेषज्ञों ने सतर्कता बरतने की सलाह दी है।
चीन में मिला नया बैट-कोरोनावायरस
चीन में पाया गया यह नया बैट-कोरोनावायरस भी जानवरों से इंसानों में फैलने की क्षमता रखता है, ठीक उसी तरह जैसे COVID-19 महामारी फैली थी। वैज्ञानिकों के अनुसार, HKU5-CoV-2 नामक यह नया कोरोनावायरस तेज़ी से फैल सकता है और गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।
गौरतलब है कि कोविड-19 का कारण बनने वाला SARS-CoV-2 वायरस भी सबसे पहले चीन में ही पाया गया था, और इसका मुख्य स्रोत चमगादड़ों को माना गया था। इतना ही नहीं, यह वायरस मानव शरीर में ACE2 नामक रिसेप्टर को अटैक करके संक्रमण फैलाता रहा था।
HKU5-CoV-2 और इसका जोखिम
चीनी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वायरोलॉजिस्ट शि झेंगली की अगुवाई में वैज्ञानिकों की एक टीम ने HKU5-CoV-2 की खोज की है। शि झेंगली को कोरोनावायरस पर उनके आजीवन शोध के कारण “बैटवुमन” के नाम से भी जाना जाता है। वैज्ञानिकों ने बताया कि यह नया वायरस मेरबेकोवायरस सबजेनस से संबंधित है, जो मिडिल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (MERS) से जुड़ा हुआ है।
इस वायरस की प्रकृति को लेकर जर्नल Cell में प्रकाशित एक शोधपत्र में वैज्ञानिकों ने लिखा: “बैट मेरबेकोवायरस (HKU5-CoV-2), जो जेनेटिक रूप से MERS-CoV से संबंधित है, इंसानों में फैलने का उच्च जोखिम रखता है। संरचनात्मक विश्लेषण से संकेत मिलता है कि यह वायरस श्वसन तंत्र और छोटी आंत को संक्रमित करने की क्षमता रखता है।”
वायरस की प्रकृति?
शोधकर्ताओं का कहना है कि यह नया कोरोनावायरस जरूर एक नई खोज है, लेकिन इसके फैलने के जोखिम को बढ़ा-चढ़ाकर नहीं देखा जाना चाहिए। प्रारंभिक अध्ययन से पता चला है कि भले ही यह मानव रिसेप्टर ACE2 से जुड़ सकता है, लेकिन इसकी बाइंडिंग क्षमता SARS-CoV-2 की तुलना में कमजोर हो सकती है। फिलहाल, इस वायरस की प्रकृति और व्यवहार को विस्तार से समझने की आवश्यकता है, इसलिए भविष्य के खतरों का सही अनुमान लगाना अभी मुश्किल है।
क्या यह नया कोरोनावायरस एक और महामारी का कारण बन सकता है? इस पर मिनेसोटा विश्वविद्यालय के संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. माइकल ओस्टरहोम का कहना है कि यह निष्कर्ष अतिशयोक्तिपूर्ण होगा। उन्होंने बताया कि 2019 के मुकाबले वैश्विक आबादी अब SARS और MERS वायरस के प्रति अधिक प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर चुकी है। ऐसे में, HKU5-CoV-2 के कारण महामारी आने की संभावना फिलहाल कम है। हालांकि, इस वायरस की वास्तविक प्रकृति को समझना अभी बाकी है।
HKU5-CoV-2 की खोज ने वैज्ञानिक समुदाय को सतर्क कर दिया है, लेकिन यह कहना जल्दबाजी होगी कि यह अगली महामारी का कारण बनेगा। शोधकर्ता लगातार इस वायरस की प्रकृति और इसके प्रभावों का अध्ययन कर रहे हैं। सतर्कता बनाए रखना जरूरी है, लेकिन फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है।
नोट:- उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।





