महाकुंभ के रूप में पूरे विश्व ने किये भारत के विराट स्वरूप के दर्शन -प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री मोदी ने मंगलवार को लोकसभा में महाकुंभ के आयोजन पर चर्चा की। उन्होंने इस अवसर पर इस आयोजन में योगदान देने वाले सभी लोगों का धन्यवाद किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “आज मैं इस सदन के माध्यम से उन सभी देशवासियों को नमन करता हूं, जिनकी बदौलत महाकुंभ का सफल आयोजन संभव हुआ। महाकुंभ की सफलता में अनेक लोगों का योगदान है… मैं सभी कर्मयोगियों का अभिनंदन करता हूं। मैं पूरे देश के श्रद्धालुओं, उत्तर प्रदेश और विशेष रूप से प्रयागराज की जनता का आभार प्रकट करता हूं।”
प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले वर्ष अयोध्या में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह ने यह अहसास कराया कि भारत अगले 1000 वर्षों के लिए कैसे तैयार हो रहा है। इस वर्ष महाकुंभ ने हमारी इस सोच को और अधिक सशक्त किया है और देश की सामूहिक चेतना हमें अपने सामर्थ्य का एहसास कराती है।
उन्होंने कहा, “मानव इतिहास में ऐसे कई क्षण आते हैं जो आने वाली पीढ़ियों को दिशा प्रदान करते हैं।” प्रधानमंत्री मोदी ने महाकुंभ को लेकर कहा कि इस आयोजन में लोग सुविधा और असुविधा की चिंता किए बिना पूरे उत्साह से शामिल हुए। उन्होंने कहा कि हमारी परंपराएं पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ रही हैं। आज का युवा अपनी आस्था और परंपराओं को गर्व के साथ अपना रहा है। एक राष्ट्र के रूप में हम बड़े लक्ष्यों को प्राप्त करने के प्रति अधिक आत्मविश्वास से भर गए हैं। अपनी विरासत से जुड़ने की परंपरा आज के भारत की सबसे बड़ी पूंजी बन गई है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि युवा पीढ़ी भी पूरे उत्साह से महाकुंभ का हिस्सा बनी। महाकुंभ पर सवाल उठाने वालों को करारा जवाब मिला है। देश के कोने-कोने में आध्यात्मिक चेतना जागृत हुई है। उन्होंने महाकुंभ को भारत के इतिहास का एक महत्वपूर्ण मोड़ बताते हुए कहा कि इस आयोजन ने दुनिया को भारत की भव्यता और व्यापकता से परिचित कराया। यह ‘सबका प्रयास’ का साक्षात उदाहरण बना।
उन्होंने कहा, “मैं देश के श्रद्धालुओं, उत्तर प्रदेश की जनता और विशेष रूप से प्रयागराज की जनता का हृदय से धन्यवाद करता हूं।” उन्होंने भगीरथ प्रयास का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस तरह गंगा को धरती पर लाने के लिए अथक परिश्रम किया गया था, उसी तरह महाकुंभ का आयोजन भी एक महाप्रयास का परिणाम है। प्रधानमंत्री ने कहा, “मैंने लाल किले से ‘सबका प्रयास’ पर जोर दिया था और महाकुंभ ने विश्व के सामने भारत के विराट स्वरूप को प्रस्तुत किया। यही ‘सबका प्रयास’ का वास्तविक उदाहरण है।”
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि महाकुंभ ने हमारे सामर्थ्य को लेकर उठने वाली शंकाओं का उचित उत्तर दिया है। उन्होंने कहा, “महाकुंभ में हमने अपनी राष्ट्रीय चेतना के जागरण का भव्य दृश्य देखा। यह हमें नए संकल्पों की सिद्धि के लिए प्रेरित करता है।”
उन्होंने कहा कि महाकुंभ से कई अमृत निकले हैं और ‘एकता का अमृत’ इसका सबसे पवित्र प्रसाद है। महाकुंभ ऐसा आयोजन था, जिसमें देश के सभी हिस्सों से लोग एकत्र हुए और व्यक्तिगत अहंकार को त्यागकर ‘वयम्’ के भाव के साथ प्रयागराज में एकजुट हुए। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर देते हुए कहा, “देश के इतिहास में ऐसे कई क्षण आए हैं, जिन्होंने राष्ट्र को नई दिशा दी और जागरूक किया।” उन्होंने स्वामी विवेकानंद के शिकागो सम्मेलन, महात्मा गांधी के दांडी मार्च और नेताजी सुभाष चंद्र बोस के ‘दिल्ली चलो’ नारे का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रयागराज महाकुंभ भी एक ऐसे ही ऐतिहासिक मोड़ की तरह है, जिसने जागृत होते भारत का प्रतिबिंब प्रस्तुत किया।
प्रधानमंत्री ने अपनी हाल ही की मॉरीशस यात्रा का जिक्र करते हुए बताया, “मैं त्रिवेणी का पवित्र जल मॉरीशस ले गया था। जब वहां के गंगा तालाब में इस जल को प्रवाहित किया गया तो वहां श्रद्धा और उत्साह का अनुपम वातावरण बना।” उन्होंने लोकसभा में कहा कि महाकुंभ से प्रेरणा लेते हुए हमें नदी उत्सव की परंपरा को नए आयाम देने चाहिए। इससे वर्तमान पीढ़ी को जल का महत्व समझ में आएगा और नदियों की स्वच्छता एवं संरक्षण सुनिश्चित होगा। उन्होंने कहा कि भारत की नई पीढ़ी महाकुंभ से जुड़ी और गर्व के साथ अपनी आस्था एवं परंपराओं को स्वीकार कर रही है।

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