मोदी सरकार के सक्रिय और लगातार कूटनीतिक प्रयासों के परिणामस्वरूप, 2014 से अब तक विदेशों में विभिन्न आरोपों में कैद 10,000 से अधिक भारतीय नागरिक सुरक्षित रूप से स्वदेश लौट चुके हैं। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, रमजान के इस्लामी पवित्र महीने में यूएई द्वारा लगभग 500 भारतीय कैदियों को माफी देने का फैसला भारत और खाड़ी देशों के बीच मजबूत द्विपक्षीय संबंधों को दर्शाता है।
यूएई से 2783 और सऊदी अरब से 850 कैदियों की रिहाई
एक अधिकारी ने बताया कि 2014 के बाद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विदेश में भारतीय नागरिकों के कल्याण को प्राथमिकता दी गई है। कूटनीतिक बातचीत और उच्च-स्तरीय हस्तक्षेप के माध्यम से विदेशों में कैद लगभग 10,000 भारतीयों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की गई है। कूटनीतिक प्रयासों के महत्वपूर्ण उदाहरणों में 2022 में यूएई से 2,783 भारतीय कैदियों की रिहाई और 2019 में सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान द्वारा अपनी भारत यात्रा के दौरान 850 भारतीय कैदियों की रिहाई का आदेश देना शामिल है।
कतर से आठ लोगों की रिहाई
2023 में कतर द्वारा मौत की सजा पाए भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारियों की रिहाई को सबसे अहम कूटनीतिक प्रयास माना गया है। सूत्रों के अनुसार, उनमें से आठ को मृत्युदंड सुनाया गया था, लेकिन भारत के कूटनीतिक हस्तक्षेप के कारण उनकी सजा कम कर दी गई और उनमें से अधिकांश को रिहा कर दिया गया। इसके अलावा, एक अन्य इस्लामी देश ईरान ने 2024 में 77 भारतीय नागरिकों और 2023 में 12 मछुआरों सहित 43 लोगों को रिहा किया था। वहीं, 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बहरीन यात्रा के दौरान बहरीन सरकार ने 250 भारतीय कैदियों को माफी दी थी।






