भारत द्वारा चिनाब नदी का पानी रोकने के बाद पाकिस्तान में जल संकट गंभीर रूप ले चुका है। देश के प्रमुख जलाशय मंगला और तरबेला तेजी से सूखते जा रहे हैं, जिससे न सिर्फ सिंचाई और जलविद्युत उत्पादन प्रभावित हो रहा है, बल्कि खरीफ फसलों की बुआई भी संकट में आ गई है।
इस्लामाबाद। कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि (1960) को निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही पाकिस्तान को जल प्रवाह संबंधी आंकड़ों की आपूर्ति भी रोक दी गई है। इस कदम से पाकिस्तान की पहले से ही जर्जर जल प्रबंधन व्यवस्था पर और दबाव बढ़ गया है।
जलाशयों में आधे से भी कम रह गया जलस्तर
सिंधु और झेलम नदियों पर स्थित पाकिस्तान के दो बड़े डैम मंगला और तरबेला में जल संग्रहण अब आधी क्षमता से भी नीचे पहुंच गया है। जल विशेषज्ञों के अनुसार यह स्थिति न केवल सिंचाई बल्कि बिजली उत्पादन को भी बुरी तरह प्रभावित कर रही है। पंजाब और सिंध प्रांतों के किसान सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।
10.3% घटा जल प्रवाह, खरीफ फसलें संकट में
सिंधु नदी प्रणाली प्राधिकरण के अनुसार, 2 जून 2025 को पंजाब क्षेत्र में जल प्रवाह पिछले वर्ष की तुलना में 10.3% कम रहा। कुल जल प्रवाह 1,28,800 क्यूसेक तक सीमित रह गया है, जो सिंचाई की जरूरतों के लिए बेहद अपर्याप्त है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि मानसून में और देरी होती है, तो खरीफ की बुआई प्रभावित हो सकती है और फसलें नष्ट होने का खतरा बढ़ सकता है।
भारत ने रोके आंकड़े, पूर्व चेतावनी प्रणाली ठप
भारत द्वारा सिंधु जल संधि के तहत जलस्तर की जानकारी साझा करना बंद कर देने से पाकिस्तान की पूर्व चेतावनी प्रणाली को गहरा झटका लगा है। जल प्रवाह के डेटा के अभाव में पाकिस्तान प्राकृतिक आपदाओं और बाढ़ जैसी स्थितियों से समय रहते निपटने में असमर्थ होता जा रहा है।
गर्मी और मानसून की देरी ने बढ़ाई मुश्किलें
देश भर में भीषण गर्मी और मानसून की देरी ने किसानों की समस्याएं और बढ़ा दी हैं। अनुमान है कि जून के अंत तक मानसून के पहुंचने की संभावना बेहद कम है, जिससे किसानों को सिंचाई के लिए पानी की भारी कमी झेलनी पड़ सकती है।
सरकार की प्रतिक्रिया: “गंभीर जल संकट”
पाकिस्तान सरकार ने इस स्थिति को “गंभीर जल संकट” घोषित करते हुए भारत के कदम की निंदा की है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि भारत की नीतियों से पाकिस्तान की खाद्य सुरक्षा को खतरा पैदा हो गया है। उन्होंने इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने की बात कही है।
वैकल्पिक जल स्रोतों की तलाश शुरू
सरकार अब वैकल्पिक जल स्रोतों की तलाश और जल संरक्षण परियोजनाओं को प्राथमिकता दे रही है। सिंधु नदी प्राधिकरण आने वाले दिनों में नए जल प्रबंधन उपायों की घोषणा कर सकता है। साथ ही, मानसून की गतिविधियों पर भी लगातार निगरानी रखी जा रही है।
सामाजिक और आर्थिक असर भी दिखने लगे
इस जल संकट का असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सामाजिक ढांचे पर भी पड़ रहा है। सिंचाई की कमी के कारण किसानों की आय घट रही है, जिससे बेरोजगारी और पलायन की प्रवृत्ति बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-पाकिस्तान के बीच जल विवाद आने वाले समय में और गहर सकता है, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता को भी खतरा हो सकता है।





