केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि वक्फ अधिनियम और बोर्ड 1995 में लागू हुआ था। वक्फ में गैर-मुस्लिमों को शामिल करने के संबंध में उठाए जा रहे सभी तर्क वक्फ में हस्तक्षेप से जुड़े हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वक्फ में कोई भी गैर-मुस्लिम शामिल नहीं होगा।
बुधवार को लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक 2024 चर्चा के लिए पेश किया गया। इस दौरान कांग्रेस ने जोरदार हंगामा किया। चर्चा के दौरान अमित शाह ने स्पष्ट किया कि वक्फ में कोई भी गैर-इस्लामिक सदस्य नहीं रहेगा। उन्होंने विपक्षी दलों की आपत्तियों को खारिज करते हुए कहा कि इस बिल को लेकर लोगों में भ्रम फैलाया जा रहा है। शाह ने दृढ़ता से कहा कि वक्फ में कोई भी गैर-मुस्लिम सदस्य नहीं आएगा।
लोकसभा में चर्चा के दौरान अमित शाह ने कहा कि मुस्लिम समुदाय को यह विश्वास दिलाया जाता है कि वक्फ में कोई गैर-मुस्लिम सदस्य नहीं आएगा। वक्फ बोर्ड में संपत्तियों को बेचने या औने-पौने दाम पर किराए पर देने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी। वक्फ बोर्ड और वक्फ परिषद ऐसे लोगों को पकड़ने का काम करेंगे। उन्होंने कहा कि मुतवल्ली गैर-इस्लामिक नहीं है। वक्फ बोर्ड और वक्फ परिषद में गैर-मुस्लिम सदस्यों की बात केवल इस उद्देश्य से है कि काम सही ढंग से हो रहा है या नहीं। वक्फ धार्मिक संस्था है, लेकिन वक्फ बोर्ड नहीं। चैरिटी कमिश्नर का काम ट्रस्ट को चलाना नहीं है, बल्कि यह देखना है कि ट्रस्ट सही ढंग से संचालित हो रहा है या नहीं।
अमित शाह ने कहा कि यदि 2013 का संशोधन नहीं हुआ होता, तो आज इस संशोधन की आवश्यकता नहीं पड़ती। कांग्रेस सरकार ने दिल्ली लूटियंस की 125 संपत्तियाँ वक्फ को दे दीं और उत्तर रेलवे की जमीन भी वक्फ को सौंप दी। हिमाचल प्रदेश में वक्फ की जमीन बताकर मस्जिदें बनाने का कार्य हुआ। शाह ने तमिलनाडु से कर्नाटक तक के उदाहरण दिए, जिस पर विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया और सदन को भ्रमित करने का आरोप लगाया।
भाजपा नेता मोहसिन रजा ने वक्फ संशोधन विधेयक की सराहना करते हुए कहा कि इस बिल का विरोध वे लोग कर रहे हैं जिन्होंने गरीब और वंचित मुस्लिमों के अधिकारों को छीना था। मोदी सरकार ने लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल पेश किया है और इसे जल्द ही पारित किया जाएगा। यह एक ऐतिहासिक दिन होगा जिसे मुस्लिम कल्याण दिवस के रूप में पहचाना जाएगा। मोदी सरकार ने तीन तलाक, धारा 370 और अब वक्फ संशोधन बिल जैसे ऐतिहासिक निर्णय लिए हैं, जो देशहित और जनहित के लिए आवश्यक हैं।






