रणथम्भौर टाइगर रिजर्व, जिसे देश में बाघों की सबसे सुरक्षित शरणस्थली माना जाता है, से हैरान करने वाली खबर सामने आई है। पिछले एक साल में यहां से 16 बाघ और बाघिन लापता हो गए हैं। करोड़ों रुपए वार्षिक खर्च करने के बावजूद भी जंगल की सुरक्षा भगवान भरोसे नजर आ रही है। लापता हुए बाघ-बाघिनों का अब तक कोई सुराग नहीं मिल सका है।
सवाईमाधोपुर: देश के सबसे सुरक्षित बाघ संरक्षण क्षेत्र के तौर पर पहचान बनाने वाले रणथम्भौर टाइगर रिजर्व पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। करोड़ों रुपए खर्च के बावजूद सुरक्षा व्यवस्थाएं कमजोर साबित हो रही हैं। अधिकारियों की लापरवाही के चलते बीते वर्ष में 26 बाघ-बाघिन गायब हो गए। रिजर्व प्रशासन ने जल्दबाजी में 10 बाघों को खोजने का दावा किया है, लेकिन 16 अब भी लापता हैं। गायब होने वालों में बाघ टी-90 की फीमेल शावक, बाघिन टी-92, बाघ टी-20, टी-70, टी-71, टी-76 और भैरूपुरा का बाघ भी शामिल हैं। एक साल पहले रिजर्व में 73 बाघ थे, लेकिन कमजोर निगरानी और असफल एंटी-पोचिंग सिस्टम के चलते संख्या घट गई। वन विभाग के अनुसार पिछली गणना में यहां 67 बाघ शेष थे।
सरिस्का में भी लापता बाघ का सुराग नहीं
सरिस्का टाइगर रिजर्व में भी एसटी-13 नामक बाघ दो साल से गायब है, जिसका अब तक कोई पता नहीं चला है। प्रशासन मॉनिटरिंग कर रहा है, लेकिन नतीजा शून्य है। फिलहाल सरिस्का में 42 बाघ हैं।
रणथम्भौर में 26 गायब, केवल 10 की मिली जानकारी
रणथम्भौर टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या उसकी क्षमता से अधिक है, जिससे कई बाघ नए इलाकों की तलाश में करौली-धौलपुर और मध्यप्रदेश के जंगलों की ओर बढ़ जाते हैं। कुछ बाघ वृद्ध भी हो सकते हैं, जिससे उनकी खोज मुश्किल हो जाती है- मनोज पाराशर, पूर्व सीसीएफ, रणथम्भौर
बाघों की जांच के लिए बनी थी पांच सदस्यीय समिति
बाघों के गायब होने के मामले में एक पांच सदस्यीय समिति बनाई गई थी, जिसने रणथम्भौर का निरीक्षण कर अधिकारियों और कर्मचारियों से सवाल-जवाब किए। कई चौकियों और नाकों का भी दौरा किया गया। अब भी 15 से अधिक बाघ-बाघिन लापता हैं और इस पर रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी गई है- टी. मोहनराज, जांच समिति सदस्य
बंद पड़े कैमरे, निष्क्रिय वॉच टावर
रणथम्भौर टाइगर रिजर्व में शिकार रोकने के लिए 60 करोड़ की लागत से ई-सर्विलांस सिस्टम लगाया गया था, लेकिन टेंडर नवीनीकरण न होने से अधिकांश कैमरे बंद पड़े हैं। वॉच टावर भी निष्क्रिय हो चुके हैं और निगरानी व्यवस्था महज औपचारिकता बनकर रह गई है। बीते सात सालों में 90 से ज्यादा वन्यजीवों के शिकार की घटनाएं सामने आईं, जिनमें बाघ, सांभर और हिरण शामिल हैं। चार साल में 15 शिकारी पकड़े गए, लेकिन अधिकतर को पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया।
ट्रेसिंग के प्रयास जारी
वन विभाग के अनुसार, कुछ लापता बाघ-बाघिन कैमरा ट्रैप में पकड़े गए हैं, जबकि बाकी की तलाश जारी है। अनुमान है कि कई वृद्ध बाघों की प्राकृतिक मृत्यु भी हो सकती है, इसलिए वे कैमरों में नहीं आ पाए। फिर भी उनकी खोजबीन जारी है- अरिजित बनर्जी, हेड ऑफ फॉरेस्ट, राजस्थान वन विभाग






