राजस्थान की चर्चित सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा 2021 से जुड़ा विवाद अब अपने अंतिम फैसले की ओर बढ़ रहा है। इस विषय पर 20 मई को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी। यह बैठक पहले 21 मई को प्रस्तावित थी, लेकिन अब इसे एक दिन पहले रखा गया है।
क्यों है यह बैठक अहम?
यह बैठक राजस्थान हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुसार बुलाई गई है। कोर्ट ने राज्य सरकार को 26 मई तक SI भर्ती पर ठोस निर्णय लेने का समय दिया है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि सरकार तय समय में फैसला नहीं लेती, तो न्यायालय स्वयं हस्तक्षेप करेगा, जिसकी जिम्मेदारी संबंधित विभागों और अधिकारियों पर होगी।
बैठक में इन 5 बिंदुओं पर होगी चर्चा:
- अब तक हाईकोर्ट में हुई सुनवाई और प्रस्तुत दलीलों की समीक्षा
- पहले से तैयार कैबिनेट सब-कमेटी की रिपोर्ट
- SOG द्वारा की गई गिरफ्तारियां और एकत्र साक्ष्य
- अभ्यर्थियों और याचिकाकर्ताओं की मांगों का विश्लेषण
- आगे की रणनीति – भर्ती रद्द हो या संशोधित की जाए?
अभ्यर्थियों की नजरें फैसले पर टिकीं
हजारों अभ्यर्थी इस बैठक को लेकर आशान्वित हैं। उनका सवाल है कि जब पहले से ही कैबिनेट सब-कमेटी रिपोर्ट सौंप चुकी है, तो दोबारा बैठक की क्या आवश्यकता है? उनकी प्रमुख मांग है, पुरानी भर्ती को रद्द कर एक पारदर्शी प्रक्रिया के तहत नई भर्ती शुरू की जाए।
अब तक की प्रमुख घटनाएं
• RPSC ने वर्ष 2021 में 859 पदों पर SI और प्लाटून कमांडर की भर्ती प्रक्रिया शुरू की थी।
• परीक्षा के बाद पेपर लीक की शिकायतें सामने आईं और जांच SOG को सौंपी गई।
• जांच में कई गिरफ्तारियां हुईं, जिनमें कुछ ट्रेनी SI भी शामिल थे।
• इसके बाद भर्ती की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाएं हाईकोर्ट में दायर की गईं।
• हाईकोर्ट ने 18 नवंबर, 6 जनवरी और 9 जनवरी को यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए।
• पुलिस मुख्यालय ने 10 जनवरी को आदेश जारी कर ट्रेनी SI की फील्ड ट्रेनिंग रोक दी, जो अब भी प्रभावी है।
पक्ष-विपक्ष की दलीलें
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि पेपर लीक साबित हो चुका है, इसलिए भर्ती रद्द होनी चाहिए। SOG, पुलिस मुख्यालय, महाधिवक्ता कार्यालय और कैबिनेट सब-कमेटी भी इसे रद्द करने की सिफारिश कर चुके हैं। वहीं, ट्रेनी SI का पक्ष है कि उन्होंने इस भर्ती के लिए अन्य नौकरियों के अवसर छोड़े हैं, और उनकी कोई संलिप्तता नहीं है। भर्ती रद्द करना उनके साथ अन्याय होगा।






