सिंगापुर और हांगकांग में एक बार फिर कोरोना वायरस का असर बढ़ने लगा है। नए वेरिएंट LF.7 और JN.1 के चलते संक्रमण की रफ्तार तेज हो गई है और मौतों की संख्या में भी इज़ाफा देखा जा रहा है। क्या कोरोना एक बार फिर बड़ा खतरा बन सकता है?
तेजी से बढ़ रहे संक्रमण के मामले
दोनों देशों में हाल के हफ्तों में कोरोना के मामलों में तेजी देखी गई है। भले ही लक्षण मामूली हों, लेकिन संक्रमित लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि वक्त के साथ लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो रही है और जिन बुजुर्गों ने बूस्टर डोज नहीं ली है, उनमें संक्रमण का असर ज्यादा दिख रहा है। इसी कारण सरकारें सतर्क हो गई हैं और नागरिकों से एहतियात बरतने की अपील कर रही हैं।
सिंगापुर में हालात
सिंगापुर में कोरोना मामलों में अचानक उछाल आया है। मई के पहले सप्ताह में जहां 11,000 से अधिक मामले सामने आए, वहीं दूसरे सप्ताह में यह संख्या 14,000 पार कर गई। हालांकि, गंभीर मामलों की संख्या कम है और अस्पतालों में भर्ती की ज़रूरत ज्यादा नहीं पड़ी है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि LF.7 और JN.1 वेरिएंट सबसे अधिक फैल रहे हैं, जो पुराने वायरस के बदले हुए रूप हैं। इनसे गंभीर बीमारी नहीं हो रही है, लेकिन ये तेजी से फैल रहे हैं। सरकार ने मास्क पहनने और भीड़ से बचने की सलाह दी है।
हांगकांग में भी बढ़ी चिंता
हांगकांग में भी बुजुर्गों में संक्रमण तेजी से फैल रहा है। नालियों के पानी में वायरस की मौजूदगी बढ़ने से संकेत मिला है कि संक्रमण फैल रहा है। पिछले कुछ हफ्तों में यहां 81 मरीजों की हालत गंभीर हुई और 30 लोगों की मौत हुई है, जिनमें अधिकतर पहले से बीमार या बुजुर्ग थे। डॉक्टरों का कहना है कि जिन लोगों ने बूस्टर डोज नहीं ली है, वे ज्यादा खतरे में हैं। इसलिए सरकार फिर से टीकाकरण को बढ़ावा दे रही है।
कोरोना अब बनता जा रहा है मौसमी बीमारी
विशेषज्ञों का मानना है कि कोविड-19 अब मौसमी बीमारी जैसा व्यवहार कर रहा है, जैसे फ्लू या जुकाम साल में दो बार बढ़ता है। सिंगापुर का स्वास्थ्य विभाग भी मानता है कि कोरोना की लहरें भविष्य में आती रहेंगी, लेकिन सतर्कता और समय पर वैक्सीन से स्थिति नियंत्रण में रह सकती है।
भारत में कैसी स्थिति है?
भारत में अभी कोरोना की स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन सिंगापुर और हांगकांग में बढ़ते मामलों को देखते हुए सतर्क रहना जरूरी है। भारत में टेस्टिंग की संख्या पहले से कम हो गई है, लेकिन हाल की सरकारी रिपोर्ट्स में संक्रमण में हल्की बढ़ोतरी देखी गई है। लोग अब मास्क पहनना और हाथ धोने जैसे नियमों को नज़रअंदाज कर रहे हैं, जो चिंता का कारण बन सकता है।
बचाव ही सबसे बड़ा उपाय
कोरोना से बचने के लिए अब भी सावधानी जरूरी है। जिन्हें बूस्टर डोज नहीं लगी है, उन्हें जल्द लगवाना चाहिए। भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क पहनें और सर्दी-जुकाम जैसे लक्षणों को हल्के में न लें। हाथों की स्वच्छता का ध्यान रखें और हल्के लक्षण दिखें तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें।






