अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव के दौरान शिक्षा मंत्रालय को बंद करने के अपने वादे को पूरा किया है। गुरुवार को उन्होंने इससे जुड़े एक आदेश पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत अब संघीय स्तर पर शिक्षा मंत्रालय को समाप्त किया जाएगा। ट्रंप के इस फैसले की पूरी दुनिया में चर्चा हो रही है। अमेरिका की शिक्षा प्रणाली को दुनिया की बेहतरीन व्यवस्थाओं में से एक माना जाता है। ऐसे में इस फैसले को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं, जैसे – शिक्षा मंत्रालय के बंद होने के बाद अमेरिका की शिक्षा व्यवस्था कैसे चलेगी? इसका शिक्षण संस्थानों पर क्या असर होगा? उनके वित्तीय संसाधन कैसे प्रबंधित होंगे? छात्रों और उनके अभिभावकों की स्थिति क्या होगी? आइए जानते हैं…
अमेरिका में शिक्षा मंत्रालय की स्थापना
अमेरिका में शिक्षा मंत्रालय की स्थापना 1979 में तत्कालीन राष्ट्रपति जिमी कार्टर द्वारा की गई थी। इसका उद्देश्य विभिन्न राज्यों और संघीय स्तर पर शैक्षिक नीतियों की निगरानी करना और स्कूलों को वित्तीय सहायता प्रदान करना था। अमेरिका की शिक्षा प्रणाली भारत और अन्य देशों से अलग है। यहां शिक्षा की जिम्मेदारी संघीय सरकार की बजाय राज्य और जिला प्रशासन पर अधिक होती है। यानी संघीय शिक्षा मंत्रालय स्कूलों को संचालित करने या उनका पाठ्यक्रम निर्धारित करने का कार्य नहीं करता, बल्कि यह जिम्मेदारी राज्यों और जिलों की होती है।
शिक्षा मंत्रालय की भूमिका
- संघीय शिक्षा मंत्रालय सरकारी और कुछ निजी स्कूलों के लिए वित्तीय सहायता के महत्वपूर्ण कार्यक्रमों से जुड़ा होता है, खासतौर पर दिव्यांग और कमजोर वर्ग के छात्रों के लिए।
- यह मंत्रालय अमेरिका में नागरिक अधिकारों को लागू करने में भी भूमिका निभाता है, ताकि स्कूलों में नस्लीय और लैंगिक भेदभाव न हो।
- शिक्षा मंत्रालय पूरे देश में स्कूलों के आंकड़े एकत्र करने और शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाने का कार्य करता है।
हालांकि ट्रंप ने शिक्षा मंत्रालय को खत्म करने का आदेश दिया है, लेकिन यह प्रक्रिया इतनी आसान नहीं होगी। अमेरिका में मंत्रियों की नियुक्ति और उन्हें हटाने का अधिकार राष्ट्रपति के पास होता है, लेकिन मंत्रालयों की स्थापना, उनकी फंडिंग और अन्य प्रशासनिक अधिकार अमेरिकी संसद के अधीन होते हैं। - अमेरिकी संसद के उच्च सदन (सीनेट) में ट्रंप को इस प्रस्ताव के लिए सुपरमेजोरिटी (100 में से 60 सांसदों का समर्थन) चाहिए होगा। वर्तमान में सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी के 53 और डेमोक्रेटिक पार्टी के 47 सदस्य हैं। ऐसे में ट्रंप को डेमोक्रेटिक पार्टी के 7 सांसदों का समर्थन चाहिए, जो मुश्किल हो सकता है।
- निचले सदन (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) में भी ट्रंप के लिए यह आसान नहीं होगा। इससे पहले जब शिक्षा मंत्रालय को खत्म करने का प्रस्ताव रखा गया था, तो रिपब्लिकन पार्टी के 60 सांसदों और पूरी डेमोक्रेटिक पार्टी ने इसका विरोध किया था।
ट्रंप प्रशासन की आगे की योजना
इसके बावजूद ट्रंप अपने फैसले पर आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने शिक्षा मंत्री लिंडा मैक्मेहन को आदेश दिया है कि वे इस मंत्रालय को समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू करें और संघीय जिम्मेदारियों को राज्यों और जिला प्रशासन को हस्तांतरित करें। हालांकि, इस आदेश में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि शिक्षा मंत्रालय खत्म होने के बाद उसके कार्यक्रमों का क्या होगा या उसके कर्मचारियों को किसी अन्य मंत्रालय में स्थानांतरित किया जाएगा या नहीं। यह भी तय नहीं है कि संघीय सरकार शिक्षा से जुड़े वित्तीय सहायता और छात्रों के कर्ज की व्यवस्था कैसे करेगी। शिक्षा मंत्रालय को समाप्त करने से सैकड़ों स्कूलों को मिलने वाली वित्तीय सहायता बंद हो जाएगी। इसका असर शिक्षकों, छात्रों और खासकर दिव्यांग और अल्पसंख्यक छात्रों को बढ़ावा देने वाले स्कूलों पर अधिक पड़ेगा।
शिक्षा मंत्रालय का विरोध क्यों?
शिक्षा मंत्रालय की स्थापना के समय से ही रिपब्लिकन पार्टी इसके खिलाफ रही है। 1980 के राष्ट्रपति चुनाव में रोनाल्ड रीगन ने भी इसे खत्म करने की बात कही थी। रिपब्लिकन पार्टी का मानना है कि शिक्षा को राज्यों और स्थानीय प्रशासन के अधीन रखना चाहिए, ताकि वे अपनी जरूरत और आबादी के अनुसार निर्णय ले सकें। डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में रिपब्लिकन पार्टी ने शिक्षा मंत्रालय पर नागरिक अधिकारों के नाम पर उदारवादी विचारधारा को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। उन्होंने नस्लीय भेदभाव को रोकने के लिए वित्तीय सहायता की जगह कानूनी कार्रवाई करने का पक्ष लिया। ट्रंप प्रशासन ने कई कॉलेजों के खिलाफ नस्लीय भेदभाव के मामलों की जांच भी शुरू कर दी है। ऐसे में शिक्षा मंत्रालय को खत्म करने के उनके फैसले को लेकर आगे क्या होगा, यह देखना दिलचस्प होगा।






