भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने 1 अगस्त, 2025 को कुल 32,000 करोड़ रुपये की सरकारी प्रतिभूतियों की नीलामी की घोषणा की है, जिसका निपटान 4 अगस्त, 2025 को किया जाएगा। इस कदम का उद्देश्य दीर्घकालिक बॉन्ड्स के पुन: निर्गम के ज़रिए सरकार के बाजार उधार को सुचारु रूप से प्रबंधित करना है।
6.68% और 6.90% प्रतिफल वाली दो प्रतिभूतियों का पुन: निर्गम
नीलामी में दो सरकारी प्रतिभूतियों का दोबारा निर्गम किया जाएगा, पहली 6.68% प्रतिफल वाली जीएस 2024 और दूसरी 6.90% प्रतिफल वाली जीएस 2065। दोनों बॉन्ड्स के लिए अधिसूचित राशि 16,000 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। निपटान 4 अगस्त, 2025 को किया जाएगा।
2,000 करोड़ रुपये तक का अतिरिक्त अभिदान विकल्प उपलब्ध
आरबीआई ने प्रत्येक प्रतिभूति पर 2,000 करोड़ रुपये तक के अतिरिक्त अभिदान को स्वीकार करने का विकल्प भी बरकरार रखा है, जिससे कुल निर्गम राशि संभावित रूप से 36,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।
नीलामी प्रक्रिया और समय
यह नीलामी आरबीआई के मुंबई स्थित कार्यालय में बहु-मूल्य पद्धति के तहत आयोजित की जाएगी।
• प्रतिस्पर्धी बोलियां: 1 अगस्त को सुबह 10:30 से 11:30 बजे तक
• गैर-प्रतिस्पर्धी बोलियां: सुबह 10:30 से 11:00 बजे तक, ई-कुबेर प्लेटफॉर्म पर प्रस्तुत की जा सकती हैं।
• नीलामी के परिणाम उसी दिन घोषित किए जाएंगे।
• गैर-प्रतिस्पर्धी बोली के लिए 5% आरक्षित
खुदरा निवेशकों और संस्थागत भागीदारों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने अधिसूचित राशि का 5% गैर-प्रतिस्पर्धी बोली के लिए आरक्षित किया है। इच्छुक निवेशक आरबीआई रिटेल डायरेक्ट प्लेटफॉर्म के माध्यम से बोलियां प्रस्तुत कर सकते हैं।
कुछ महत्वपूर्ण दिशानिर्देश:
• एक निवेशक कई बोलियां दे सकता है, परंतु कुल राशि सीमा से अधिक नहीं होनी चाहिए।
• बॉन्ड न्यूनतम 10,000 रुपये और उसके गुणकों में खरीदे जा सकते हैं।
• आरबीआई को किसी भी बोली को स्वीकृत या अस्वीकार करने का पूर्ण अधिकार होगा।
• सफल बोली लगाने वालों को बॉन्ड उनके SGL या CSGL खाते में क्रेडिट कर दिए जाएंगे।
• इन बॉन्ड्स पर ब्याज हर छह माह में मिलेगा।
• ये बॉन्ड विदेशी निवेशकों के लिए भी खुले हैं और रेपो लेनदेन के लिए पात्र हैं।
डिजिटल भुगतान सूचकांक मार्च 2025 में पहुंचा 493.22 पर
आरबीआई द्वारा जारी डिजिटल भुगतान सूचकांक (DPI) मार्च 2025 में बढ़कर 493.22 पर पहुंच गया, जो कि सितंबर 2024 में 465.33 था। यह देश में तेज़ी से बढ़ते डिजिटल भुगतान को दर्शाता है। जनवरी 2021 में शुरू हुआ यह सूचकांक मार्च 2018 को आधार वर्ष मानते हुए 100 पर निर्धारित किया गया था। इसका लगातार बढ़ना शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में डिजिटल लेन-देन को अपनाने में हो रही प्रगति को दर्शाता है।





