प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कर्तव्य पथ पर एक सार्वजनिक समारोह में देश को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि सीसीएस की नई इमारतें केवल संरचनाएं नहीं हैं, बल्कि अमृत काल में विकसित भारत की नीतियों और महत्वपूर्ण फैसलों का केंद्र बनेंगी। आने वाले वर्षों में राष्ट्र की दिशा इन्हीं भवनों से तय होगी।

कर्तव्य भवन के उद्घाटन अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि यह केवल एक भवन नहीं, बल्कि करोड़ों देशवासियों के सपनों को साकार करने की तपोभूमि है। उन्होंने कहा कि हम आधुनिक भारत के निर्माण की ऐतिहासिक उपलब्धियों के साक्षी बन रहे हैं—चाहे वह कर्तव्य पथ हो, नया संसद भवन, रक्षा मंत्रालय की नई इमारतें, भारत मंडपम, यशोभूमि या राष्ट्रीय युद्ध स्मारक।
प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘कर्तव्य’ केवल एक शब्द नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति का मूल भाव है। यह सेवा, समर्पण और कर्म की भावना को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि ‘कर्तव्य भवन’ नाम लोकतंत्र और संविधान के मूल्यों को प्रतिबिंबित करता है।
उन्होंने कहा कि आजादी के बाद दशकों तक प्रशासनिक कामकाज ब्रिटिश काल की जर्जर इमारतों से चलाया गया, जहां न पर्याप्त जगह थी, न रोशनी, न वेंटिलेशन। गृह मंत्रालय जैसा अहम विभाग भी लगभग सौ साल से उसी पुरानी इमारत में काम कर रहा था।
मोदी ने यह भी बताया कि अभी हजारों कर्मचारी एक मंत्रालय से दूसरे मंत्रालय में रोज आना-जाना करते हैं, जिससे समय और संसाधनों की बर्बादी होती है। इससे न केवल ट्रैफिक बढ़ता है, बल्कि कामकाज में भी अक्षम्यता आती है।
उन्होंने कहा कि 21वीं सदी के भारत को उसी सदी के अनुरूप व्यवस्थाएं और आधुनिक, सुरक्षित और सुविधाजनक इमारतें चाहिए। इसलिए कर्तव्य पथ के आसपास एक समग्र योजना के तहत कर्तव्य भवनों का निर्माण किया जा रहा है।
उन्होंने जानकारी दी कि यह पहला कर्तव्य भवन पूरा हुआ है, और कई अन्य पर कार्य तेजी से जारी है। इससे कर्मचारियों को बेहतर वातावरण और जरूरी सुविधाएं मिलेंगी, जिससे उनका कार्यक्षमता भी बढ़ेगी। साथ ही, सरकार जो हर साल लगभग 1500 करोड़ रुपये किराए में खर्च कर रही है, वह भी बचेगा।






