
कैंसर की 17 दवाएं भी हुईं सस्ती; शराब होगी महंगी, ट्रेडिंग पर भी टैक्स बढ़ा
अब बजट के जरिए इम्पोर्ट ड्यूटी में बदलाव होने पर ही कुछ वस्तुओं के दामों में उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। ज्यादातर उत्पादों की कीमतें जीएसटी काउंसिल तय करती है। ऐसे में इस बजट से आम लोगों को क्या राहत मिली और किन चीजों पर जेब ढीली करनी पड़ सकती है, आइए जानते हैं—
क्या हुआ सस्ता?
- कैंसर की दवाएं सस्ती
सरकार ने कैंसर उपचार में उपयोग होने वाली 17 जीवनरक्षक दवाओं पर बेसिक कस्टम ड्यूटी पूरी तरह खत्म कर दी है। इसके साथ ही 7 दुर्लभ बीमारियों के इलाज में काम आने वाली आयातित दवाओं और विशेष आहार पर भी टैक्स नहीं लगेगा। इससे महंगे इलाज से जूझ रहे मरीजों और उनके परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी।
- माइक्रोवेव ओवन की कीमतें घट सकती हैं
घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए माइक्रोवेव ओवन के कुछ अहम पार्ट्स पर कस्टम ड्यूटी कम की गई है। इससे आने वाले समय में माइक्रोवेव ओवन सस्ते हो सकते हैं। सरकार का लक्ष्य भारत को कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स का वैश्विक केंद्र बनाना है।
- ईवी बैटरी और सोलर पैनल होंगे सस्ते
ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देते हुए लिथियम-आयन बैटरी बनाने वाली मशीनों पर मिलने वाली टैक्स छूट का दायरा बढ़ाया गया है। अब बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम में इस्तेमाल होने वाले सामान पर भी ड्यूटी नहीं लगेगी। वहीं, सोलर ग्लास में उपयोग होने वाले ‘सोडियम एंटीमोनेट’ को भी टैक्स फ्री कर दिया गया है, जिससे सोलर पैनल की लागत घटेगी।
- जूते और कपड़े हो सकते हैं सस्ते
निर्यात बढ़ाने के लिए लेदर, टेक्सटाइल और समुद्री उत्पाद सेक्टर को राहत दी गई है—
- सी-फूड एक्सपोर्ट के लिए ड्यूटी फ्री इम्पोर्ट लिमिट 1% से बढ़ाकर 3% कर दी गई।
- लेदर, सिंथेटिक जूते और ‘शू अपर्स’ के एक्सपोर्ट पर टैक्स छूट का दायरा बढ़ाया गया।
क्यों घटेंगे दाम?
कच्चा माल सस्ता होने से प्रोडक्शन कॉस्ट कम होगी। यदि कंपनियां इसका फायदा उपभोक्ताओं तक पहुंचाती हैं, तो लेदर शूज, स्पोर्ट्स शूज और सी-फूड की कीमतें कम हो सकती हैं या स्थिर रह सकती हैं।
- विदेश यात्रा पड़ेगी सस्ती
विदेशी टूर पैकेज पर लगने वाला टैक्स (TCS) घटाकर अब सीधा 2% कर दिया गया है। पहले 10 लाख रुपये तक 5% और उससे ऊपर 20% TCS लगता था। अब रकम की कोई सीमा नहीं रहेगी, जिससे विदेश घूमना पहले से सस्ता होगा।
- एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस सस्ता
नागरिक उड्डयन और रक्षा क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए एयरक्राफ्ट के पार्ट्स और कंपोनेंट्स पर कस्टम ड्यूटी हटा दी गई है। इससे विमान निर्माण, मरम्मत और रखरखाव की लागत घटेगी।
विदेशी सामान मंगाना होगा सस्ता
निजी इस्तेमाल के लिए विदेश से मंगाए जाने वाले सामान पर टैक्स 20% से घटाकर 10% कर दिया गया है, जिससे आम उपभोक्ताओं को सीधा फायदा मिलेगा।
क्या हुआ महंगा?
- शराब पर टीसीएस 1% से बढ़ाकर 2% कर दिया गया है। इससे शराब की कीमतों में इजाफा हो सकता है।
- फ्यूचर ट्रेडिंग पर लगने वाला एसटीटी 0.02% से बढ़ाकर 0.05% और ऑप्शंस पर 0.15% कर दिया गया है, जिससे ट्रेडिंग महंगी होगी।
टीसीएस क्या है?
टीसीएस यानी ‘सोर्स पर टैक्स कलेक्शन’, जो एडवांस इनकम टैक्स की तरह होता है। दुकानदार इसे बाद में ITR भरते समय एडजस्ट कर सकता है।
एसटीटी क्या है?
एसटीटी हर शेयर या डेरिवेटिव सौदे पर लगने वाला टैक्स है। दरें बढ़ने से हर ट्रांजैक्शन पर ज्यादा भुगतान करना होगा।
नॉलेज पार्ट
ज्यादातर वस्तुओं की कीमतें जीएसटी काउंसिल तय करती है। 22 सितंबर 2025 से चार जीएसटी स्लैब को घटाकर दो (5% और 18%) कर दिया गया है। जीएसटी काउंसिल की 56वीं बैठक में यह फैसला लिया गया था, जिससे घी-पनीर से लेकर कार और एसी तक कई चीजें सस्ती हुई हैं।





