जर्मनी ने हथियारों के निर्यात पर रोक लगाई, हमास से युद्ध के चलते लिया फ़ैसला

जर्मनी ने घोषणा की है कि वह अगले आदेश तक ऐसे किसी भी सैन्य उपकरण का निर्यात नहीं करेगा, जिसका इस्तेमाल गाज़ा में किया जा सकता है। चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने शुक्रवार को कहा कि इस्राइली बंधकों की रिहाई और युद्धविराम उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है, लेकिन गाज़ा के भविष्य में हमास की कोई भूमिका नहीं होनी चाहिए।
मर्ज ने स्पष्ट किया कि इस्राइल को हमास के आतंक से अपनी रक्षा करने का पूरा अधिकार है। उन्होंने कहा कि 22 महीने से जारी संघर्ष में ठोस बातचीत के ज़रिए बंधकों की रिहाई और युद्धविराम हासिल करना जर्मनी की प्राथमिकता है। हालांकि, गाज़ा में इस्राइली सेना की हालिया सख़्त कार्रवाई, जिसे कल रात इस्राइली कैबिनेट ने मंजूरी दी, जर्मन सरकार के लिए यह समझना कठिन बना रही है कि ये लक्ष्य कैसे पूरे होंगे। इसी कारण, जर्मनी फिलहाल ऐसे किसी भी सैन्य उपकरण के निर्यात को मंजूरी नहीं देगा, जिसका उपयोग गाज़ा में किया जा सकता है।
गौरतलब है कि 7 अक्तूबर 2023 को हमास ने इस्राइल के कई इलाकों पर हमला किया था, जिसमें लगभग 1,200 इस्राइली नागरिक मारे गए और करीब ढाई सौ लोगों को बंधक बना लिया गया। इनमें से कई की मौत हो चुकी है, कुछ को समझौते के तहत छोड़ा गया है, जबकि कुछ अब भी हमास के कब्जे में हैं। इसके जवाब में इस्राइल ने हमास के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया। युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक 60,000 से अधिक फ़िलिस्तीनी मारे जा चुके हैं, जिनमें अधिकांश महिलाएं और बच्चे हैं। गाज़ा की पूरी आबादी विस्थापन और भुखमरी का सामना कर रही है। उधर, इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हाल ही में कहा कि उनका देश गाज़ा पर कब्ज़ा या उसे अपने में मिलाना नहीं चाहता। उनका लक्ष्य केवल हमास को समाप्त करना और फिर गाज़ा का प्रशासन एक अस्थायी सरकार को सौंपना है। साथ ही, युद्ध समाप्त होने के बाद इस्राइल गाज़ा की सुरक्षा अपने हाथ में रखना चाहता है।

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