मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सड़क सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए घोषणा की कि प्रदेश के सभी बस चालकों का हर तीन महीने में अनिवार्य मेडिकल व फिटनेस टेस्ट होगा। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से आँखों की नियमित जांच आवश्यक है ताकि किसी भी दृष्टि दोष के कारण यात्रियों की जान खतरे में न पड़े। मुख्यमंत्री ने इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित परिवहन विभाग की सेवाओं के शुभारंभ और शिलान्यास कार्यक्रम में कहा कि यात्री की जान बचाना ही विभाग की सकारात्मक छवि का आधार है। लापरवाही से होने वाली मौतें न केवल बदनामी लाती हैं बल्कि आर्थिक नुकसान भी कराती हैं।
मुख्यमंत्री के मुख्य निर्देश व घोषणाएँ:
- बस चालकों के लिए अनिवार्य मेडिकल और फिटनेस टेस्ट – हर तीन महीने पर।
- सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान – बड़े स्तर पर चलाया जाएगा, जिसमें पुलिस, तकनीकी संस्थान और स्कूलों की भागीदारी होगी।
- बेहतर परिवहन से रोजगार सृजन – ग्रामीण क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बढ़ाकर लगभग तीन लाख रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सड़क सुरक्षा के लिए हेलमेट, सीट बेल्ट, नशे में ड्राइविंग और ओवर स्पीडिंग पर सख्त नियम लागू होंगे तथा मीडिया के जरिए इनका व्यापक प्रचार किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि पुलिस द्वारा बनाए गए एप से दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की पहचान की जा रही है, जिससे कई जगह हादसों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है। ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर परिवहन व्यवस्था पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इलेक्ट्रिक बसों को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए चार्जिंग स्टेशनों में निजी क्षेत्र की भागीदारी जरूरी है। साथ ही, पुराने वाहनों की स्क्रैपिंग को प्रोत्साहित किया जाएगा ताकि प्रदूषण और दुर्घटनाओं का खतरा घटे।
कार्यक्रम में परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने बताया कि आने वाले समय में इलेक्ट्रिक बसें गांव-गांव तक पहुंचेंगी। वर्तमान में प्रदेश के 12 हजार से अधिक गांवों में बस सेवाएं नहीं हैं, लेकिन अगले छह माह में हर गांव तक बसें चलाने का लक्ष्य रखा गया है। इस अवसर पर महापौर सुषमा खर्कवाल, प्रमुख सचिव अमित गुप्ता, परिवहन आयुक्त ब्रजेश नारायण सिंह सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित रहे।






