ई-20 पेट्रोल से तेल के आयात पर निर्भरता कम, प्रदूषण से भी मिलेगी राहत

भारत अपनी कुल जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में पेट्रोल में इथेनॉल का मिश्रण आयात पर निर्भरता घटाने और खर्च कम करने का बड़ा साधन बन रहा है। इसे ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
हाल ही में भारत ने तय लक्ष्य से पाँच साल पहले ही 20% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ई-20) उपलब्ध करा दिया है। अब सरकार का अगला लक्ष्य वर्ष 2027 तक इसे 27% तक ले जाना है। हालांकि, इसके बीच कई बहसें चल रही हैं। कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि ई-20 वाहनों के इंजन पर असर डाल सकता है और माइलेज घटा सकता है, जबकि सरकार और वैज्ञानिक इसे ऊर्जा सुरक्षा, प्रदूषण नियंत्रण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाला कदम बता रहे हैं।

ई-20 पेट्रोल क्या है?
इसे 80% सामान्य पेट्रोल और 20% इथेनॉल मिलाकर तैयार किया जाता है। इथेनॉल गन्ना, मक्का, धान और फसल अवशेषों से बनाया जाता है। इससे किसानों को अतिरिक्त आमदनी होगी और पराली जलाने से होने वाला प्रदूषण भी कम होगा।

ई-20 पेट्रोल के फायदे:
• तेल आयात पर निर्भरता घटेगी।
• किसानों की आय बढ़ेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
• कार्बन उत्सर्जन और प्रदूषण में कमी आएगी।
• पराली से निपटने का एक व्यावहारिक समाधान मिलेगा।
• ऊर्जा स्वतंत्रता की दिशा में बड़ा कदम होगा।

ई-20 पेट्रोल की चुनौतियाँ:
• कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार गाड़ियों का माइलेज 2-6% तक घट सकता है।
• पुरानी गाड़ियों के इंजन और पुर्ज़ों पर प्रतिकूल असर पड़ने की संभावना है।
• नमी सोखने की प्रवृत्ति (हाइग्रोस्कोपिक) के कारण ईंधन प्रणाली में जंग लगने का खतरा बढ़ता है।
• विंटेज और पुराने वाहनों के लिए यह हानिकारक हो सकता है।
• अभी तक इस पर पर्याप्त अध्ययन नहीं हुआ है और न ही नीति पूरी तरह स्पष्ट है।

अंतरराष्ट्रीय अनुभव:
ब्राजील ने 1973 के तेल संकट के बाद इथेनॉल का उपयोग बढ़ाया था और आज वहां फ्लेक्स-फ्यूल इंजन बड़ी सफलता के साथ चल रहे हैं। भारत में भी 5% से शुरुआत कर अब 20% मिश्रण तक पहुँचा गया है और आने वाले वर्षों में इसे और आगे ले जाने की योजना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि असली बहस इथेनॉल बनाम इलेक्ट्रिक वाहन या खाद्य सुरक्षा बनाम ऊर्जा सुरक्षा की नहीं, बल्कि संतुलन खोजने की होनी चाहिए। भारत को शहरी क्षेत्रों में इलेक्ट्रिक वाहन, आईसीई वाहनों के लिए इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल और कचरे से 2जी इथेनॉल—all तीनों पर समान ध्यान देना होगा।
अंततः, इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को ऊर्जा स्वतंत्रता और स्वच्छ भविष्य की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा सकता है। लेकिन इसके लिए स्पष्ट नीति, गहन अध्ययन, मजबूत इंजन तकनीक और उपभोक्ताओं का भरोसा हासिल करना बेहद जरूरी है।

विशिखा मीडिया

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