
एक हालिया रिपोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कैंसर अब केवल शहरों तक सीमित बीमारी नहीं है, बल्कि ग्रामीण भारत में भी इसका प्रसार तेजी से हो रहा है। भारतीय जनसंख्या में सभी आयु वर्ग के लोग इस बीमारी से प्रभावित हो रहे हैं। आंकड़े दर्शाते हैं कि कैंसर अब किसी विशेष उम्र या क्षेत्र की समस्या न रहकर पूरे समाज के लिए गंभीर चुनौती बन गया है। पहले इसे शहरी जीवनशैली से जुड़ी बीमारी माना जाता था, लेकिन अब गांवों में भी इसके मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। पुरुष, महिलाएं यहां तक कि बच्चे भी इसके शिकार हो रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार शहरी जीवनशैली, बढ़ता प्रदूषण, फास्ट फूड की आदतें, धूम्रपान और तनाव तो कैंसर के बड़े कारण हैं ही, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी, समय पर इलाज न मिलना और गलत धारणाएं भी जोखिम को और बढ़ा रही हैं। महिलाओं में ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर बढ़ते दिख रहे हैं, जबकि पुरुषों में मुंह, फेफड़े और प्रोस्टेट कैंसर अधिक पाए जा रहे हैं। बच्चों में ल्यूकेमिया जैसी गंभीर बीमारियां चिंता बढ़ा रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार, गांवों में प्रति एक लाख जनसंख्या पर औसतन 93 पुरुष कैंसर से पीड़ित पाए गए हैं। खराब दिनचर्या और असंतुलित खानपान भी इस खतरे को और बढ़ा रहे हैं।
भारत में कैंसर के आंकड़े
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के अनुसार वर्ष 2022 में देशभर में लगभग 14.6 लाख नए कैंसर मामले दर्ज किए गए। अनुमान है कि हर एक लाख लोगों में करीब 100 लोग इस बीमारी से प्रभावित हो रहे हैं। अध्ययन बताते हैं कि तंबाकू और धूम्रपान सबसे बड़े जोखिम कारक हैं, जिनसे मुंह, फेफड़े और ग्रासनली का कैंसर बढ़ता है। अस्वास्थ्यकर आहार, शारीरिक निष्क्रियता और प्रदूषण भी बड़ी वजहें हैं।
ग्रामीण भारत में स्थिति
2012 से 2019 के बीच दर्ज 7 लाख से अधिक कैंसर मामलों और 2 लाख से ज्यादा मौतों के विश्लेषण से पता चला कि ग्रामीण भारत में कैंसर का बोझ लगातार बढ़ रहा है। इनमें करीब 54% मरीज महिलाएं थीं और रोगियों की औसत आयु 56 वर्ष रही। दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर राज्यों के कई हिस्सों में कैंसर की दर सबसे अधिक पाई गई। उदाहरण के लिए, केरल के पथानामथिट्टा जिले में पुरुषों का कैंसर इंसीडेंस रेट 260.9 और महिलाओं का 209.4 प्रति लाख रहा, जो कई शहरी इलाकों से भी ज्यादा है। इसी तरह मेघालय, असम और उत्तर प्रदेश के वाराणसी जैसे जिलों में भी उच्च दरें दर्ज हुईं।
बढ़ते खतरे पर चेतावनी
विश्व स्वास्थ्य संगठन और ग्लोबोकैन 2022 के आंकड़ों के अनुसार, महिलाओं में सबसे अधिक मामले ब्रेस्ट कैंसर के दर्ज होते हैं, जबकि सर्वाइकल कैंसर भी तेजी से बढ़ रहा है। केवल 2022 में ब्रेस्ट कैंसर के लगभग 1.92 लाख और सर्वाइकल कैंसर के करीब 1.28 लाख मामले सामने आए। इसके अलावा, हाल ही में हुए एक अध्ययन में यह भी सामने आया कि रोजमर्रा के उपयोग में आने वाले शैंपू और लोशन जैसे उत्पादों में मौजूद हानिकारक तत्व भी कैंसर के खतरे को बढ़ा सकते हैं।
नोट- संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।






