मसल्स बनाने के लिए प्रोटीन का यूज कहाँ तक सही; जानिए “अतिरिक्त प्रोटीन सिर्फ हल्का सा बूस्ट देता है”

मसल्स बनाने के लिए प्रोटीन का सेवन सही माना जाता है, लेकिन क्या ज्यादा प्रोटीन लेना भी स्वास्थ्य के लिए अच्छा है या फिर यह नुकसानदेह साबित हो सकता है? आइए जानते हैं इस विषय पर विशेषज्ञों की राय।

शरीर में प्रोटीन का असर मसल्स (मांसपेशियों) पर कैसा पड़ता है, इसे लेकर कई शोध और मेटा-एनालिसिस हो चुके हैं। इन अध्ययनों से पता चलता है कि अगर रेजिस्टेंस ट्रेनिंग यानी वेट ट्रेनिंग के साथ प्रोटीन की मात्रा बढ़ाई जाए, तो थोड़े बहुत फायदे जरूर मिलते हैं। हालांकि, कई शोधों में यह भी पाया गया है कि अधिक प्रोटीन लेने से शरीर पर कोई खास असर नहीं पड़ता। 2018 की एक मेटा-एनालिसिस के अनुसार, प्रोटीन सप्लीमेंट से मसल्स और स्ट्रेंथ में बढ़ोतरी होती है, लेकिन एक सीमा तक ही। यानी, शरीर के वजन के अनुपात में ही प्रोटीन का सेवन लाभकारी होता है। प्रति दिन 1.62 ग्राम प्रति किलोग्राम वजन तक प्रोटीन लेना सही माना गया है, जबकि हाल की एक अन्य स्टडी ने इसे घटाकर 1.1 ग्राम प्रति किलोग्राम बताया है।

अतिरिक्त प्रोटीन का क्या होता है?
शोधों में यह स्पष्ट किया गया है कि अगर कोई व्यक्ति इससे अधिक प्रोटीन लेता है, तो उसका अतिरिक्त हिस्सा शरीर मूत्र के जरिए बाहर निकाल देता है। इसी तरह, क्रिएटिन जो तीन अमीनो एसिड से बना यौगिक है, बॉडीबिल्डर्स द्वारा मसल्स ग्रोथ के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह तब ही असरदार होता है जब इसे वेट ट्रेनिंग के साथ लिया जाए। प्रोटीन का लाभ इस बात पर भी निर्भर करता है कि वह किस स्रोत से लिया जा रहा है, डाइट से या सप्लीमेंट से, और क्या वह प्लांट-बेस्ड है या एनिमल-बेस्ड। कई बार शोधों में कुल प्रोटीन सेवन (डाइट + सप्लीमेंट) का सटीक विवरण नहीं होता, इसलिए केवल अध्ययनों के नतीजों पर निर्भर रहना उचित नहीं है।

क्या ज्यादा प्रोटीन नुकसानदायक है?
बहुत अधिक प्रोटीन का सेवन हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ा सकता है। कुछ स्टडीज में पाया गया है कि हाई-प्रोटीन डाइट से कार्डियोवैस्कुलर रिस्क बढ़ सकता है, हालांकि अधिकांश शोधों में इसका सीधा संबंध नहीं मिला है। आमतौर पर एनिमल प्रोटीन शरीर में आसानी से अवशोषित होता है और इसे मसल्स ग्रोथ के लिए अधिक प्रभावी माना जाता है। एक अध्ययन, जिसे बीफ इंडस्ट्री ने प्रायोजित किया था, में ऑम्निवोर और वीगन डाइट की तुलना की गई। दोनों में प्रोटीन की मात्रा समान थी और नौ दिन की ट्रेनिंग के बाद मसल्स प्रोटीन सिंथेसिस में कोई खास फर्क नहीं देखा गया। कहा जाता है कि जब प्रोटीन को अलग कर दिया जाता है, तो वह शरीर में जल्दी अवशोषित होता है। जैसे चना पास्ता, पूरे चनों की तुलना में ज्यादा प्रोटीन प्रदान करता है। संयुक्त राष्ट्र के फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन के अनुसार, औसत अमेरिकी रोजाना लगभग आधा पाउंड (लगभग 225 ग्राम) मांस खाता है, इसमें अंडे, डेयरी और पौधों से मिलने वाला प्रोटीन शामिल नहीं है। यानी ज्यादातर लोग पहले से ही पर्याप्त प्रोटीन ले रहे हैं। इसलिए, याद रखने योग्य बात यह है कि जरूरत के मुताबिक प्रोटीन का सेवन करना ही फायदेमंद है। आवश्यक मात्रा से अधिक प्रोटीन लेना शरीर को अतिरिक्त लाभ नहीं पहुंचाता।

विशिखा मीडिया

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