कार्तिक पूर्णिमा पर करोड़ों भक्त गंगा में लगाएंगे आस्था की डुबकी

अबकी बार गंगा स्नान पर्व, कार्तिक पूर्णिमा के पावन अवसर पर, कल (5 नवंबर 2025 को) मनाया जाएगा। यह पर्व हिन्दू धर्म में अत्यंत पौराणिक, आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्ता रखता है, जिसमें गंगा नदी के तट पर श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाकर मोक्ष और पुण्य की कामना करते हैं। गंगा स्नान पर्व केवल स्नान की धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि वह जन-जन की आस्था, पाप-निवारण, सामाजिक सहभागिता और सांस्कृतिक पहचान का पर्व है। यह पर्व भी देश के कोने-कोने से जुड़ी करोड़ों आस्थाओं को एक बार फिर पवित्र गंगा तटों पर एकत्र करेगा, जो सनातन परंपरा की जीती-जागती मिसाल है।गंगा स्नान पर्व के पीछे अनेक पौराणिक कथा एवं धार्मिक विश्वास प्रचलित हैं। मान्यता है कि इस दिन गंगा में स्नान करने मात्र से अपने पिछले जन्मों के साथ ही वर्तमान जन्म में अनजाने में किए गए पाप भी धुल जाते हैं तथा मोक्ष की प्राप्ति संभव होती है। इसे पापनाशिनी से भी संबोधित किया गया है। ऐसा विश्वास है कि गंगा स्वयं स्वर्ग से पृथ्वी पर भागीरथ के तप के कारण अवतरित हुई थी, जिससे उनके स्नान से सभी प्रकार के पाप, कष्ट और बंधन समाप्त हो जाते हैं। यही कारण है कि देवताओं तक के बारे में कहा गया है कि वे भी इस पुण्यतिथि पर पृथ्वी पर उतरकर गंगा में स्नान करते हैं और भक्तों को आशीर्वाद प्रदान करते हैं। कई शास्त्रों एवं पुराणों (जैसे पद्म पुराण) में भयंकर पापों के निवारण और मुक्ति के लिए गंगा स्नान को महत्ता दी गई है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन विशेष आग्रह है कि सूर्योदय के समय गंगा में स्नान किया जाए, अपने सामर्थ्य अनुसार अन्न, वस्त्र आदि का दान किया जाए क्योंकि स्नान के बाद तर्पण, जप और दान पुण्य करने से उसका गुण कई गुना अधिक हो जाता है। यह पर्व “देव-दीपावली” के रूप में भी प्रसिद्ध है, जब देवता भी दीप प्रज्वलित कर गंगा में आशीर्वाद देने के लिए उपस्थित माने जाते हैं।

प्रमुख तीर्थ स्थल जहाँ सर्वाधिक स्नान होता है

गंगा स्नान पर्व पर देशभर से लाखों श्रद्धालु गंगा के विभिन्न प्रसिद्ध तटों पर एकत्रित होते हैं। इनमें से कुछ तीर्थ स्थानों में सबसे अधिक भीड़ उमड़ती है। इसमें प्रयागराज (त्रिवेणी संगम) प्रमुख है। यहाँ गंगा, यमुना और सरस्वती का संगम होता है। पर्व के समय विशाल भीड़ एकत्र होती है। हरिद्वार (हर की पौड़ी) यह देवभूमि उत्तराखंड में स्थित है। हर की पौड़ी विश्व प्रसिद्ध गंगा घाट है। यहाँ रोजाना लाखों लोग स्नान व आरती के लिए आते हैं। कार्तिक पूर्णिमा पर यहाँ अद्भुत दृश्य होता है। वहीं एक और तीर्थ स्थल वाराणसी, जहाँ भगवान शिव की प्रिय नगरी काशी में दशाश्वमेध घाट सबसे प्रसिद्ध है, यहाँ गंगा स्नान के साथ भव्य आरती भी होती है। यहाँ गंगा स्नान करने से अद्भुत आत्मिक शांति की अनुभूति होती है। वहीं ऋषिकेश (त्रिवेणी घाट) हिमालय की तलहटी में स्थित एक और तीर्थ स्थल है। यह स्थान शुद्ध, शांतिपूर्ण और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर है। यहाँ सुबह-शाम श्रद्धालु स्नान व आरती के लिए पहुंचते हैं। गंगा स्नान पर यहाँ भी काफी भीड़ जुटती है। वहीं गंगासागर, जो बंगाल की खाड़ी में स्थित है, यहाँ भी गंगा स्नान का काफी महत्व माना जाता है। यहाँ मकर संक्रांति के साथ कार्तिक पूर्णिमा पर भी असंख्य भक्त गंगा स्नान के लिए आते हैं। गढ़मुक्तेश्वर, दिल्ली के निकट यह स्थान भी पौराणिक है और पूर्णिमा पर विशेष भीड़ देखने को मिलती है। कुल मिलाकर गंगा स्नान पर्व श्रद्धा, भक्ति और सामाजिक समरसता का उत्सव है। जहाँ एक ओर धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होते हैं, वहीं दूसरी ओर विशाल मेलों, घाटों की सफाई, भजन-कीर्तन और आरती से पूरा वातावरण खास आध्यात्मिक रस में डूब जाता है। मेले के बहाने विभिन्न संस्कृति और क्षेत्रों के लोग एकत्र होते हैं, जो भारतीयता को एक सूत्र में बाँधता है। इन तीर्थ स्थलों पर सुरक्षा और स्वास्थ्य की विशेष व्यवस्था की जाती है।

संजय सक्सेना
वरिष्ठ पत्रकार, लखनऊ

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