डब्ल्यूएचओ ने वर्ष 2002 में अपने यूरोपीय क्षेत्र को पोलियो मुक्त घोषित किया था, जबकि भारत वर्ष 2011 में इस बीमारी से पूरी तरह मुक्त हो चुका है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में पोलियो केवल दो देशों पाकिस्तान और अफगानिस्तान में ही स्थानिक (एंडेमिक) रूप में मौजूद है।
हर साल 24 अक्टूबर को विश्व पोलियो दिवस मनाया जाता है ताकि पोलियोमाइलाइटिस (पोलियो) के उन्मूलन के वैश्विक प्रयासों को गति दी जा सके और इससे जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा की जा सके।
दुनियाभर में हर साल संक्रामक रोगों के कारण लाखों लोगों की मृत्यु होती है। कुछ बीमारियाँ जानलेवा भले न हों, लेकिन वे आजीवन विकलांगता जैसी गंभीर समस्याएँ पैदा कर सकती हैं। ऐसी ही एक बीमारी पोलियो से पाकिस्तान और अफगानिस्तान अब भी संघर्ष कर रहे हैं।
डब्ल्यूएचओ की ताज़ा रिपोर्ट बताती है कि पोलियो अब केवल इन्हीं दो देशों में सक्रिय है। हालाँकि पिछले एक दशक में बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियानों के चलते मामलों में गिरावट आई है, लेकिन यह बीमारी अभी भी इन देशों में चिंता का विषय बनी हुई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी इलाके में पोलियो वायरस का एक नया मामला सामने आया है, जिससे इस वर्ष वहाँ मामलों की संख्या बढ़कर 30 हो गई है। अफगानिस्तान के कुछ हिस्सों से भी ताज़ा संक्रमण की जानकारी मिली है।
पाकिस्तान में बढ़ते मामले
पोलियो एक गंभीर बीमारी है जो पोलियोवायरस के कारण होती है। वर्ष 1988 में विश्व स्वास्थ्य सभा ने इसे पूरी तरह समाप्त करने का संकल्प लिया था। हाल की रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में 12 माह के एक बच्चे में पोलियो की पुष्टि हुई है। यह इस प्रांत का 19वां मामला है। सिंध से नौ और पंजाब व गिलगित-बाल्टिस्तान से एक-एक मामला दर्ज हुआ है।
अगस्त 2025 में भी खैबर पख्तूनख्वा और सिंध से दो नए मामले सामने आए थे। पाकिस्तान में लंबे समय से पोलियो रोधी टीकाकरण अभियान चलाए जा रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि अशिक्षा और जागरूकता की कमी के कारण कई लोग अब भी बच्चों को पोलियो की खुराक नहीं दिलाते, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ा रहता है। कुछ मामलों में प्रशासन ने सख्ती भी दिखाई है। क्वेटा प्रशासन ने फरवरी में उन पाँच अभिभावकों को गिरफ्तार किया था जिन्होंने अपने बच्चों को टीका लगवाने से इनकार कर दिया था।
अफगानिस्तान की स्थिति
अफगानिस्तान के उरुजगान प्रांत में भी पोलियो का एक नया मामला सामने आया है, जिससे इस वर्ष वहाँ मामलों की संख्या बढ़कर नौ हो गई है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अस्थिरता और असुरक्षा के माहौल के कारण टीकाकरण अभियान बाधित हो रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, यहाँ आठ महीने की एक बच्ची में संक्रमण की पुष्टि हुई है।
टीकाकरण कार्यक्रम के अधिकारी सईदुल्लाह मोहजर ने बताया कि संक्रमण को नियंत्रित करने और आस-पास के जिलों में आपातकालीन टीकाकरण शुरू करने के लिए विशेष दल तैनात किए गए हैं।
पोलियो के लक्षण और खतरे
पोलियोमाइलाइटिस वायरस संक्रमित व्यक्ति के गले और आंतों में पाया जाता है। यह संक्रमण मुख्य रूप से मल-संपर्क के ज़रिए फैलता है, जबकि छींक या खाँसी से निकली बूंदों से भी संक्रमण संभव है। लगभग 70% मामलों में लक्षण हल्के या बिना लक्षणों वाले होते हैं। गंभीर संक्रमण की स्थिति में वायरस रीढ़ की हड्डी और मस्तिष्क पर असर डालता है, जिससे लकवा (पैरालिसिस) का खतरा बढ़ जाता है।
👉 पोलियो से लड़ाई में पाकिस्तान और अफगानिस्तान की चुनौतियाँ भले जारी हों, लेकिन वैश्विक स्तर पर इसे समाप्त करने के प्रयास लगातार जारी हैं।






