नेपाल: युवाओं के आंदोलन और बढ़ते असंतोष के कारण ओली ने गंवाई कुर्सी, जानें पूरा घटना क्रम

भारत का पड़ोसी देश नेपाल लगातार दूसरे दिन हिंसा की चपेट में रहा। सतही तौर पर यह बवाल सोशल मीडिया पर लगाए गए प्रतिबंध से उपजा दिखाई देता है, लेकिन असल कारण कहीं गहरे हैं। भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और आर्थिक मोर्चे पर सरकार की नाकामियों को लेकर लंबे समय से जनता में असंतोष फ़ैल रहा था। खासकर युवा पीढ़ी में गहरी नाराजगी घर कर चुकी थी।
युवाओं और छात्रों के आंदोलनों को बलपूर्वक दबाने की कोशिश प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली पर भारी पड़ी और अंततः उन्हें पद छोड़ना पड़ा। काठमांडू की सड़कों पर शुरुआत में शांतिपूर्ण ढंग से हुए प्रदर्शन जल्द ही हिंसक हो गए, क्योंकि सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस, रबर की गोलियां और यहां तक कि गोलियां तक चलाईं।
ओली ने हिंसा का ठीकरा बाहरी घुसपैठियों पर फोड़ा और जांच समिति गठित की। पहले उन्होंने सोशल मीडिया पर लगी पाबंदी हटाने से इनकार किया, लेकिन सोमवार रात दबाव में आकर प्रतिबंध हटाना पड़ा। दरअसल नेपाल पहले से ही गहरी निराशा के दौर से गुजर रहा है। इसी साल मार्च में राजशाही समर्थक प्रदर्शनों के दौरान दो लोगों की मौत हुई थी। बेरोजगारी और राजनीतिक व्यवस्था के प्रति जनता का असंतोष लगातार बढ़ रहा था। जब सरकार ने 4 सितंबर को 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बंद किए, तो गुस्सा चरम पर पहुंच गया।

मुख्य कारण: राजनीतिक अस्थिरता, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी
2006 की जनक्रांति से तुलना करते हुए कहा जा रहा है कि मौजूदा प्रदर्शनों में जेन-जी की भागीदारी वैसी ही निर्णायक है। प्रधानमंत्री ओली के सख्त रवैये ने उनके ही सहयोगियों को उनसे दूर कर दिया। गृह मंत्री रमेश लेखक और कृषि मंत्री ने इस्तीफा दे दिया। नेपाली कांग्रेस ने भी ओली से पद छोड़ने की मांग की, जबकि विपक्षी नेताओं ने जनता की भावनाओं पर ध्यान देने की अपील की।

नेपाल की चुनौतियाँ: जर्जर अर्थव्यवस्था और अस्थिर सत्ता
पिछले 17 वर्षों में नेपाल में 14 सरकारें बदलीं, यानी लगभग हर साल एक नया प्रधानमंत्री। भ्रष्टाचार के आरोप लगभग हर बड़े नेता पर लगे—चाहे ओली हों, देउबा, प्रचंड या भट्टराई। बेरोजगारी और अवसरों की कमी ने युवाओं का गुस्सा और बढ़ाया। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक 2025 में नेपाल की प्रति व्यक्ति आय सिर्फ 1404 डॉलर होगी। रोज़गार के लिए बड़े पैमाने पर पलायन जारी है। यही कारण है कि सत्ता के अभिजात वर्ग और आम जनता की जीवनशैली के बीच का अंतर युवाओं को और भड़काता रहा। सोशल मीडिया पर “नेपोबेबी” हैशटैग का वायरल होना इसी असंतोष का प्रतीक है।

क्या सिर्फ सोशल मीडिया पाबंदी से भड़की जेन-जी?
प्रदर्शनों में शामिल अधिकांश युवा 28 वर्ष से कम उम्र के हैं। यह पहली बार है जब इतनी बड़ी संख्या में जेन-जी सड़कों पर उतरी। पर यह कहना गलत होगा कि उनका आक्रोश सिर्फ सोशल मीडिया पाबंदी से उपजा।

युवाओं की नाराजगी के पीछे छिपे कुछ कारण:

• भ्रष्टाचार पर चोट का हथियार था सोशल मीडिया – पाबंदी से पहले युवा वर्ग लगातार नेपो बेबीज और राजनीतिक परिवारों पर सवाल उठा रहा था। सोशल मीडिया उनका हथियार था, जिसे छिन लिए जाने की भावना ने उन्हें और उग्र किया।

• परिवार व कारोबार पर असर – कई व्यवसाय सोशल मीडिया पर निर्भर थे, वहीं प्रवासी नेपाली परिवार से जुड़ने के लिए इसका इस्तेमाल करते थे। प्रतिबंध को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला माना गया।

• सत्ता में वही चेहरे – 2008 में लोकतांत्रिक गणराज्य बनने के बाद से सत्ता कुछ गिने-चुने नेताओं के इर्द-गिर्द ही घूमती रही है। यही वर्चस्व आम जनता को व्यवस्था से और दूर करता गया।

विशिखा मीडिया

विशिखा ने जनवरी 2019 से राजस्थान की राजधानी जयपुर से हिंदी मासिक पत्रिका के रूप में अपनी नींव रखी। राजस्थान में सफलता का परचम फहराने के बाद विशिखा प्रबंधन ने अप्रैल 2021 से उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से मासिक पत्रिका के रूप में अपना प्रकाशन आरम्भ करने का निर्णय लिया। इसी बीच लोगों की प्रतिक्रियाएं आईं कि विशिखा का प्रकाशन दैनिक समाचार पत्र के रूप में भी होना चाहिये। पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए विशिखा प्रबंधन ने 1 जनवरी 2022 से जयपुर से दैनिक समाचार पत्र के रूप में भी अपना प्रकाशन आरम्भ किया। विशिखा में प्रमुख रूप से राजनैतिक गतिविधियों सहित, कला, समाज, पर्यटन, एवं अन्य विषयों से संबंधित विस्तृत आलेख प्रकाशित होते हैं। विशिखा पत्रिका ने अपने विस्तृत आलेखों और दैनिक न्यूज़ विश्लेषण के माध्यम से अपने पाठकों को जानकारी और ज्ञान की दुनिया में ले जाने का महत्वपूर्ण काम किया है। अपनी सटीक खबरों, विस्तृत रिपोर्टों और विशेष विषयों पर आधारित लेखों के साथ, विशिखा ने लगातार अपनी विश्वसनीयता बनायी हुई है। विशिखा मासिक पत्रिका की खबरों की गुणवत्ता, नवीनता और सटीकता को ध्यान में रखते हुए इस पत्रिका ने अपने पाठकों का दिल जीता है। यह पत्रिका न केवल जानकारी उपलब्ध कराती है, बल्कि लोगों के बीच अपने विचारों के आदान प्रदान के लिए एक मंच भी उपलब्ध करती है। इसके लेखक, संपादक और टीम का प्रयास निरंतर यह होता है कि पाठकों को एक अच्छा अनुभव देने के साथ-साथ सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक मुद्दों के साथ-साथ समस्याओं के समाधान पर ध्यान केंद्रित करें। विशिखा का लक्ष्य आपको विभिन्न विषयों पर अद्भुत लेखों से परिचित कराना है। पत्रिका के माध्यम से हम लेखकों, संगठनों, एवं समाज के प्रतिष्ठित और सामान्य लोगों को उनकी रचनात्मक योग्यताओं के आधार पर साझा करने का प्रयास करना है। पत्रिका टीम का मूल मंत्र है- रचनात्मकता, नैतिकता और उच्चतम गुणवत्ता। विशिखा हिंदी मासिक पत्रिका है जो 2019 में शुरू हुई थी। वर्तमान में यह राजस्थान और उत्तराखंड से प्रकाशित की जाती है। इसमें विभिन्न विषयों पर लेख शामिल होते हैं जैसे कि करंट अफेयर्स, साहित्य, महिलाएं, यात्रा और अधिक। हमारी पत्रिका उन लोगों के लिए है जो ज्ञान और सूचना की तलाश में होते हैं और उन्हें उन विषयों से रुबरु कराने का एक मंच प्रदान करती हैं।

Leave a Reply

Discover more from

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading