जापान के इतिहास में 21 अक्टूबर का दिन एक ऐतिहासिक पल बन गया है। देश ने अपनी पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में साने ताकाइची को चुना है।
मंगलवार को जापान की संसद ने 64 वर्षीय अति-रूढ़िवादी नेता और ‘लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी’ (एलडीपी) की प्रमुख साने ताकाइची को देश की पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में चुना। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा की जगह ली है, जिन्होंने लगातार दो चुनावी हार के बाद इस्तीफा दिया था। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, संसद के निचले सदन में ताकाइची को 237 वोट मिले, जो बहुमत से कहीं अधिक है।
“घोड़े की तरह काम करो” ताकाइची का संकल्प
प्रधानमंत्री बनने के बाद अपने पहले संबोधन में ताकाइची ने देश के पुनर्निर्माण का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा – “मैं अपने वादे निभाऊंगी। हम सबकी एकजुटता से ही जापान को पुनर्निर्मित कर सकते हैं। चूंकि हमारी संख्या कम है, इसलिए मैं सभी से अनुरोध करती हूं कि घोड़े की तरह मेहनत करें। मैं स्वयं वर्क-लाइफ बैलेंस को त्याग दूंगी और बस काम करती रहूंगी।” उन्होंने जोर देकर कहा कि जापान और एलडीपी के पुनर्निर्माण के लिए हर व्यक्ति को अपने क्षेत्र में पूरी निष्ठा से काम करना होगा। उन्होंने विनम्रता से कहा, “मैं आप सभी के मार्गदर्शन में पूरी लगन से कार्य करूंगी।” प्रधानमंत्री चुने जाने के बाद ताकाइची ने कहा, “इस समय मुझे खुशी से ज्यादा आने वाली चुनौतियों का एहसास हो रहा है। हमें मिलकर बहुत काम करना है। कई नीतियां हैं जिन्हें तुरंत लागू करने की आवश्यकता है। मैं चाहती हूं कि एलडीपी एक ऐसी पार्टी बने जो लोगों की चिंताओं को आशा में बदल सके।” तीन दशकों से अधिक के राजनीतिक अनुभव के साथ ताकाइची पहले आर्थिक सुरक्षा मंत्री समेत कई अहम पदों पर रह चुकी हैं। उनकी कठोर और स्पष्टवादी छवि के कारण आलोचक उन्हें ‘लेडी डोनाल्ड ट्रंप’ तक कहने लगे हैं, जबकि पूर्व प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा ने उन्हें मजाक में ‘तालिबान ताकाइची’ कहा था। उनकी दृढ़ नीतियों के कारण ही लोग उन्हें “जापान की आयरन लेडी” भी कहते हैं, ठीक ब्रिटेन की मार्गरेट थैचर की तरह।
मजबूत सेना और सख्त नीतियों की पैरोकार
साने ताकाइची का राजनीतिक रुख हमेशा रूढ़िवादी रहा है। वे पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की नीतियों की समर्थक रही हैं। एलडीपी जैसी पुरुष-प्रधान पार्टी की पहली महिला अध्यक्ष बनने के बाद भी उन्होंने अपने विचारों पर डटे रहना जारी रखा। वह मजबूत सेना, बढ़े हुए रक्षा बजट, परमाणु ऊर्जा, साइबर सुरक्षा और कड़े आव्रजन कानूनों की पक्षधर हैं। साथ ही, वे शाही परिवार में केवल पुरुष उत्तराधिकार का समर्थन करती हैं और समलैंगिक विवाह तथा 19वीं सदी के नागरिक कानून में संशोधन का विरोध करती हैं।
7 मार्च 1961 को जापान के नारा प्रांत में जन्मीं ताकाइची के पिता टोयोटा कंपनी में कर्मचारी और मां पुलिस अधिकारी थीं। उन्होंने कोबे विश्वविद्यालय से बिजनेस मैनेजमेंट में पढ़ाई की। पढ़ाई के बाद वे टीवी एंकरिंग और अन्य नौकरियों में रहीं। 1984 में उन्होंने मात्सुशिता इंस्टीट्यूट ऑफ गवर्नमेंट एंड मैनेजमेंट में प्रवेश लिया और कुछ वर्षों बाद वाशिंगटन डीसी में अमेरिकी प्रतिनिधि पैट श्रोएडर के लिए कांग्रेसनल फेलो के रूप में काम किया। 1989 में उन्होंने अपने अनुभवों पर एक किताब भी लिखी।
अमेरिका से लौटने के बाद ताकाइची ने राजनीति में सक्रियता बढ़ाई। 1992 में उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में पहला चुनाव लड़ा और हार गईं, लेकिन 1993 में दोबारा चुनाव जीतकर संसद में पहुंचीं। 1996 में उन्होंने एलडीपी का दामन थामा और तब से लगातार संसद सदस्य बनी हुई हैं। 2000 के दशक में वे शिंजो आबे की करीबी सहयोगी बनीं और उनसे राजनीति की बारीकियां सीखीं।
2021 और 2024 में एलडीपी के अध्यक्ष पद का चुनाव हारने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी। इस बार शिगेरु इशिबा के इस्तीफे के बाद हुए चुनाव में उन्होंने कृषि मंत्री शिंजिरो कोइजुमी को हराकर इतिहास रच दिया। अब तक वह 10 बार सांसद चुनी जा चुकी हैं और केवल एक बार ही चुनाव हारी हैं। साने ताकाइची का यह सफर न केवल जापान बल्कि पूरे विश्व की महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गया है, एक एंकर से देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनने तक की उनकी यात्रा संघर्ष, समर्पण और दृढ़ निश्चय का प्रतीक है।






