हरियाणा पुलिस में मंगलवार को उस समय हड़कंप मच गया जब आईजी वाई पूरन कुमार ने चंडीगढ़ में खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। वाई पूरन कुमार 2001 बैच के आईपीएस अधिकारी थे। हाल ही में, नौ दिन पहले ही उन्हें पीटीसी सुनारिया का आईजी नियुक्त किया गया था। घटना के बाद पुलिस विभाग में सनसनी फैल गई है। फिलहाल, किसी भी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने इस मामले में बयान देने से परहेज़ किया है। बता दें कि 21 अप्रैल को हरियाणा सरकार ने 42 आईपीएस और 13 एचपीएस अधिकारियों का तबादला किया था, जिसके तहत वाई पूरन कुमार को हरियाणा पुलिस अकादमी मधुबन से रोहतक रेंज का आईजी बनाया गया था। उन्होंने वहां लगभग पांच महीने तक जिम्मेदारी निभाई। इसके बाद 29 सितंबर को हुए तबादलों में उन्हें पीटीसी सुनारिया का आईजी नियुक्त किया गया था।
आत्महत्या की खबर मिलते ही स्थानीय पुलिस, चंडीगढ़ पुलिस के एसएसपी, सीएफएसएल और फोरेंसिक टीम मौके पर पहुंच गई। उस समय वाई पूरन कुमार की पत्नी और आईएएस अधिकारी पी अमनीत कुमार विदेश दौरे पर थीं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, मंत्री राव नरवीर सहित कई वरिष्ठ अधिकारी भी जापान दौरे पर हैं।
सूत्रों के अनुसार, वाई पूरन कुमार पिछले डेढ़ साल से सुर्खियों में थे। उन्हें एडीजीपी से आईजी रैंक में पदोन्नत किया गया था। उन्होंने “वन ऑफिसर वन हाउस” नीति के तहत शिकायत दर्ज कर कई वरिष्ठ अधिकारियों पर एक से अधिक सरकारी आवास लेने का आरोप लगाया था। इसके अलावा, उन्होंने पूर्व डीजीपी और अतिरिक्त मुख्य सचिव पर जातिगत भेदभाव के आरोप लगाते हुए आयोग में शिकायत भी की थी।
हरियाणा: वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी ने खुद को गोली मारी, नौ दिन पहले ही मिली थी नई जिम्मेदारी





